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सामाजिक संस्था सेवा सुरभि द्वारा “क्यों रूठ जाती है प्रकृति ?” विषय पर गोष्ठी आयोजित

 

सामाजिक संस्था सेवा सुरभि द्वारा “क्यों रूठ जाती है प्रकृति ?” विषय पर गोष्ठी आयोजित

इंदौर (भारती जोशी )  । सामाजिक संस्था सेवा सुरभि द्वारा “क्यों रूठ जाती है प्रकृति ?” विषय पर आयोजित गोष्ठी में इंदौर शहर के सांसद शंकर लालवानी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि, जलवायु परिवर्तन केंद्र सरकार के एजेंडे में अति संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा है। केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं जैसे राष्ट्रीय सौर मिशन, ऊर्जा दक्षता संवर्धन मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन, ग्रीन इंडिया मिशन आदि के फलस्वरूप आज जल संरक्षण, वृक्षारोपण, नदियों की सफ़ाई, पेयजल की उपलब्धता और वन और वन पर आधारित जीवन के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित करते हुए उसके संरक्षण, संवर्धन और विकास की दिशा में काम किया जा रहा है ।

इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार सदस्य रहे डॉ भरत शर्मा ने कहा कि मानव ही प्रकृति के संकट का कारण भी है और समाधान का आधार भी। यदि हम प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलें, तो जल, वायु और जलवायु—तीनों का भविष्य सुरक्षित रह सकता है। मानव की गतिविधियाँ आज प्रकृति, जल, वायु और जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े कारणों में गिनी जाती हैं। विकास की दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन जैसे वनों की कटाई, जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग, औद्योगिक अपशिष्ट, रसायन और प्लास्टिक का उपयोग, अनियोजित शहरीकरण – हरित क्षेत्रों का क्षरण, हीट आइलैंड प्रभाव और प्राकृतिक जल निकासी तंत्र का विनाश आज पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर रहा है। समायोजित और सामूहिक जिम्मेदारी लेकर हम अधिक से अधिक जल संकलन, वर्षा और दूषित जल प्रबंधन, वृक्षारोपण, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, सार्वजनिक परिवहन और ऊर्जा दक्षता को प्रोत्साहित कर इस परिवर्तन की गति को धीमा कर हमारा योगदान दे सकते है।

हिमालय से पधारे प्रसिद्ध पर्यावरणविद और कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पद्मभूषण अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि पौधारोपण के लिए समय अब बीत चुका है, हमे आज जरूरत है जल संचयन और संवर्धन की। देश में पानी के जितने भी प्राकृतिक स्त्रोत जिनमे जलस्तर कम हो गया है उन्हें चिन्हित कर उसके पुनर्भरण के प्रकल्प पर कार्य करने की आवश्यकता है। मानव ने अपने विकास के लिए प्रकृति के साथ अन्याय किया है और अब प्रकृति उससे रूठ गई है। आपने इंदौर आईआईटी में भी जनभागीदारी के माध्यम से प्राकृतिक जलाशय और उसकी संभावनाओं का रोडमैप बनाने की बात कही।

कार्यक्रम का संचालन अतुल सेठ ने और आभार प्रदर्शन अनिल त्रिवेदी ने किया। इस अवसर पर पद्मश्री जनक पलटा, ओम नरेडा, शहर काजी इशरत अली, पर्यावरणविद डॉ ओ पी जोशी, दिलीप वाघेला, प्रो राजीव शर्मा, कुमार सिद्धार्थ व इंदौर शहर के प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे।

 

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