प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़े पाक्सो मामले में नामजद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके सहयोगी चैतन्य मुकुंदानंद गिरि की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर आदेश सुरक्षित रख लिया है। शुक्रवार शाम करीब एक घंटे से अधिक समय तक चली सुनवाई के बाद, न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने यह अंतरिम राहत प्रदान की। यह आदेश स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
झूंसी थाने में दर्ज हुई थी एफआईआर
यह मामला आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश (पाक्सो अधिनियम) के आदेश के अनुपालन में दर्ज किया गया था। बीते रविवार को झूंसी थाने में एफआईआर पंजीकृत की गई, जिसके बाद पुलिस ने पूछताछ की। पीड़ितों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और मेडिकल परीक्षण भी हो चुका है।
माघ मेला व महाकुंभ में आरोप
आरोप है कि माघ मेला 2026 और महाकुंभ 2025 के दौरान नाबालिग बटुकों के साथ कुकर्म किया गया। सुनवाई से पहले ही कोर्ट नंबर 72 खचाखच भर गया था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि एक पीड़ित नाबालिग नहीं है, जबकि पीड़ित पक्ष ने अग्रिम जमानत का विरोध किया।
दोनों पक्षों की दलीलें
अग्रिम जमानत अर्जी पर वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप गुप्ता, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, शासकीय अधिवक्ता पतंजलि मिश्र और शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता रीना एन. सिंह ने अपने-अपने पक्ष रखे।
याची पक्ष का कहना था कि कथित घटनाएं मध्यप्रदेश और प्रयागराज से जुड़ी बताई जा रही हैं, जबकि पीड़ित हरदोई के नियमित छात्र हैं। मार्कशीट के अनुसार उनमें से एक बालिग है और वह आश्रम से संबंधित नहीं है। साथ ही शिकायतकर्ता के आपराधिक पृष्ठभूमि की भी बात कही गई। राज्य सरकार ने अर्जी की पोषणीयता पर आपत्ति जताई, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष ने अग्रिम जमानत का विरोध किया।
मार्च के तीसरे सप्ताह में फैसला संभव
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में निर्णय मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनाए जाने की संभावना है।


