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गीता मंदिर के साथ सब मानवता का भी श्रृंगार बने, यही हमारा संकल्प और लक्ष्य होना चाहिए – स्वामी ज्ञानानंद

इंदौर(विनोद गोयल)। सत्संग केवल एक मनोरंजन, प्रदर्शन या आयोजन नहीं बल्कि एक परिवर्तन का नाम है। हमें स्वयं तय करना होगा कि हमारे कर्म किस तरह धर्म बन जाएं। गीता जटिल नहीं, जीवन की जटिलताओं को दूर करने, गीता शुष्क नहीं जीवन की शुष्कता को दूर कर सरसता में बदलने और बेसुरे जीवन को सुर-ताल में बदलने का नाम है। तीन दिन का यह सत्संग हम सबके जीवन और परिवारों को संवारकर गीता को जन-जन की वैश्विक प्रेरणा बनाने की जरूरत है। कर्म, ज्ञान और भक्ति के समन्वय से हम अपने मुरझाए हुए जीवन को खिला सकते हैं। गीता मंदिर के साथ समूची मानवता का भी श्रृंगार बने, यही हमारा संकल्प और लक्ष्य होना चाहिए। जिस दिन हम अपने जीवन की लगाम अर्जुन की तरह श्रीकृष्ण जैसे सारथी के हाथों में सौंप देंगे, विश्वास रखें कि हमारा जीवन सचमुच धन्य हो उठेगा।

समाज के लिए कई कार्य किए
ये दिव्य और प्रेरक विचार हैं प्रख्यात गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद के, जो उन्होंने रविवार को कनाड़िया रोड, मोर्या हिल्स स्थित कुसुम देवी छावछरिया सभागृह पर सूठीबाई दौलतराम पारमार्थिक न्यास की मेजबानी में आयोजित तीन दिवसीय दिव्य गीता सत्संग के समापन प्रसंग पर उपस्थित भक्तों के सैलाब को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

प्रारंभ में जेल महानिर्देशक वरुण कपूर, समाजसेवी बालकिशन अग्रवाल, टीकमचंद गर्ग, विष्णु बिंदल, दीपक जैन टीनू, जयप्रकाश त्रिपाठी, नेपानगर की विधायक मंजू दादू, राजेंद्र गर्ग, पीडी अग्रवाल कांट्रेक्टर, दिनेश मित्तल, अरविंद बागड़ी, सुभाष बजरंग, पीडी अग्रवाल महू, राधेश्याम शर्मा गुरूजी, पवन सिंघानिया मोयरा, रामनारायण अग्रवाल आदि ने ग्लोबल इंस्पीरेशन एनलाइटनमेंट आर्गेनाइजेशन ऑफ़ भगवद गीता (जीओ गीता) के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री प्रदीप मित्तल (दिल्ली) एवं सचिव कुलभूषण मित्तल कुक्की के साथ मंगलाचरण के बीच दीप प्रज्वलन कर सत्संग का शुभारंभ किया। विद्वान वक्ता की अगवानी मनोरंजन मिश्रा, विकास गुप्ता, सीए पंकज गुप्ता, एसएन गोयल समाधान, रसनिधि गुप्ता, विलास वाणी, रितु केडिया, नानूराम कुमावत, रचना गुप्ता, मनीष चौकसे, रवि जायसवाल, आयुष मिश्रा, पार्षद प्रणव मंडल, राजेश अग्रवाल, नंदकिशोर कंदोई आदि ने की।

सभागृह एवं चिकित्सालय की सौगात
जीओ इंटरनेशनल के सेवा कार्यों की जानकारी प्रदीप मित्तल ने दी और सूठीबाई दौलतराम छावछरिया पारमार्थिक न्यास के सेवा कार्यों की जानकारी सचिव कुलभूषण मित्तल कुक्की ने दी। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के प्रमुख बालकिशन छावछरिया ने करीब 200 करोड़ रुपए की पूँजी से अपने सेवा प्रकल्पों का संकल्प 80 वर्ष की आयु में किया और अब तक खजराना गणेश मंदिर में अपने माता-पिता सूठीबाई दौलतराम छावछरिया एवं पत्नी कुसुमदेवी की समृति में सत्संग सभागृह, भोजनशाला एवं अतिथि गृह के निर्माण तथा कनाडिया रोड स्थित मोर्या हिल्स पर करोड़ों रुपए की लागत से सभागृह एवं चिकित्सालय आदि का निर्माण करा चुके हैं।

अभी भी उनका सेवा अभियान जारी है और वे करीब 50 करोड़ रुपए की लागत से एक मांगलिक भवन बनाना चाहते हैं। इस तीन दिवसीय सत्संग की स्मृति में उन्होंने 15 हजार लीटर क्षमता के शुद्ध आरओ वाटर टैंकर एवं एक शव वाहन चलाने का भी संकल्प व्यक्त किया है। यह टैंकर एवं शव वाहन मोर्या हिल्स स्थित केबीसी सभागृह से निशुल्क संचालित होंगे। मोर्या हिल्स स्थित हॉस्पिटल पर एक नई एम्बुलेंस भी आम मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद ने भी उनके इन सेवा प्रकल्पों की खुलेमन से प्रशंसा की। कुलभूषण मित्तल ने महामंडलेश्वरजी से आग्रह किया कि वे मई माह में एक बड़ा सत्संग पुनः इंदौर में करने की अनुकम्पा करें ताकि यहाँ भी कोलकाता जैसा विश्व कीर्तिमान बन सके।

परमात्मा के सुपर पॉवर से कनेक्ट करना
महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि संसार का कोई भी व्यक्ति दुःख और अशांति नहीं चाहता। एक मात्र कुंती ने ही स्वयं भगवान से दुःख माँगा था। यह शांति हमें कैसे मिलेगी इसका समाधान गीता के संदेशों में मौजूद है। गीता वास्तविकता का धरातल है। युद्ध केवल महाभारत का ही नहीं था।

हम सबके जीवन में भी अनेक संघर्ष आते रहते हैं। इन संघर्षों से मन अशांत होने लगता है। हमारे अंदर की वृत्तियाँ भी महाभारत का ही स्वरुप हैं। जब तक हम मोबाइल को चार्ज करने की तरह अपने मन को परमात्मा के सुपर पॉवर से कनेक्ट नहीं करेंगे, हमें ऊर्जा कैसे मिलेगी। लोग पूछते हैं कि गीता पाठ की जरूरत क्या है? तो ऐसे लोगों को समझना होगा कि परमात्मा से बढ़कर और कोई हमारा बॉस नहीं हो सकता। जीवन के कुछ क्षण हमें उनके लिए भी देना चाहिए जिनसे हमें यह जीवन मिला है। कुछ पल ऐसे होने चाहिए कि वो और हम साथ रहें। मन को चार्ज करने के लिए परमात्मा के सुपर पॉवर से कनेक्ट करना होगा।

जीवन के तीन महत्वपूर्ण तथ्य समझना
महामंडलेश्वर जी ने कहा कि जीवन के तीन महत्वपूर्ण तथ्य समझना होंगे। अहमता, ममता और फल इच्छा। मैं, मेरा और कामनाओं के अम्बार से अलग होकर हम जो कर्म करेंगे वो ज्यादा सार्थक होंगे। गीता में कर्म के त्याग की नहीं, कर्म फल के त्याग की बात कही गई है। मन की अशांति के कारणों का त्याग किए बिना हमारे कर्म सार्थक नहीं होंगे।

सांप कैसा भी हो, उसे देखकर डर लगता है लेकिन यदि उसके जहरीले दांतों को निकाल दिया जाए तो वह सांप बच्चों के लिए भी खिलौना बन जाता है। मूर्ख व्यक्ति स्वयं को कर्ता मान लेता है जबकि इस समूची सृष्टि और प्रकृति का संचालन तो परमात्मा करते हैं। हमारे शरीर का संचालन भी परमात्मा ही करते हैं। जीवन की व्यवस्था परमात्मा ही चलाते हैं। हमारे शरीर में रक्त प्रवाह हो या सांसों का प्रवाह सबकुछ परमात्मा के हाथों में है। फिर भी हम अहंकार पाले हुए हैं। हमारा भाव तो यह होना चाहिए कि मैं नहीं, तू ही तू………तेरी कृपा से ही सबकुछ चल रहा है।

आसक्ति को भक्ति में ले जाती गीता
उन्होंने कहा कि गीता आसक्ति को भक्ति में, अहंकार को प्यार में और कामना को आराधना में बदलने का काम करती है। एक कर्म योगी की तरह हम अपने प्रत्येक कर्तव्य का पालन परमात्मा को समर्पित करते हुए करें और हमेशा प्रार्थना करें कि मैंने अपने जीवन की डोर या लगाम आपके हाथों में सौंप दी है तो निश्चित ही हमारे कर्म सार्थक हो उठेंगे। हमारा भाव यह होना चाहिए कि जो कुछ हो रहा है वह मैं नहीं कर रहा, उसकी कृपा से हो रहा है।

हमें तय करना होगा कि हमारे कर्म धर्म बन जाएं। मैं नहीं कर रहा, मेरे पास कुछ भी नहीं और मुझे और कुछ नहीं आपकी कृपा चाहिए का भाव जिस दिन हमारे संकल्प में आ जाएगा, उस दिन हम भी अर्जुन की तरह जीवन की महाभारत को जीत सकेंगे। बाहर के एसी अंदर की चिंताओं की तपन दूर नहीं कर सकते। बाहर के शीतलपेय भी अंतर्मन की अशांति और तपन को दूर नहीं कर सकते। इस स्थिति में मुरझाए हुए जीवन को खिलाने के लिए परमात्मा के प्रति श्रद्धा और निष्ठा का भाव होना चाहिए। कार्यक्रम के समापन पर सभी भक्तों को गीता जीवन गीत बने और एक अन्य पुस्तक नियमित अध्ययन के लिए भेंट की गई। इंदौर में इस पुस्तक को जन-जन तक मनन और मंथन के उद्देश्य से पहुँचाने हेतु एक समिति का गठन भी किया गया है।

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