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साधुमार्गी जैन समता संघ ने साधु-साध्वी-भगवंतों की सेवा में जुटे 40 चिकित्सकों और 78 परिवारों का किया अभिनन्दन 

साधुमार्गी जैन समता संघ ने साधु-साध्वी-भगवंतों की सेवा में जुटे 40 चिकित्सकों और 78 परिवारों का किया अभिनन्दन

राष्ट्रीय दान पेटी प्रकल्प में पूरे देश में इंदौर द्वितीय रहा – साधारण सभा में लिए गए अनेक निर्णय

 

इंदौर, । जैन संतों, मुनियों और साधु-साध्वी वृन्द की शहर की 70 किमी परिधि और सातों दिशाओं में विहार के दौरान नियमित रूप से सेवा करने वाले शहर के 78 समर्पित परिवारों और समाज के साधु-साध्वी-भगवंतों की निष्काम सेवा में समर्पित रहने वाले 40 प्रख्यात चिकित्सकों का श्री साधुमार्गी जैन समता संघ की साधारण सभा एवं सेवा समर्पण सम्मान समारोह में आत्मीय अभिनन्दन किया गया।

गुमास्ता नगर स्थित मुकुट मांगलिक भवन पर आयोजित इस कार्यक्रम में पहले चरण में वर्ष 2025-26 का आय-व्यय विवरण सर्वानुमति से पारित किया गया, जिसे कोषाध्यक्ष अजय चौरड़िया ने प्रस्तुत किया। इस मौके पर संघ के अध्यक्ष पारस बोहरा ने आगामी तीन चातुर्मास कार्यक्रमों की रूपरेखा बताई और युवा संघ के अध्यक्ष, मंत्री और कोषाध्यक्ष के मनोनयन की भी घोषणा की। मीडिया प्रभारी पद के लिए मनीष बोहरा को पुनः सर्वसम्मति से नियुक्त किया गया। इस अवसर पर रामामृतम योजना के संयोजक अनीश सूर्या ने अभियान की अब तक की प्रगति एवं उपलब्धियों का विवरण दिया। महामंत्री पिंकेश पगारिया ने गत वर्ष का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और राकेश पोरवाल ने युवा संघ की गतिविधियों का ब्यौरा दिया। राष्ट्रीय दान पेटी प्रकल्प की सह-संयोजक श्रीमती आभा डूंगरवाल ने जब बताया कि इंदौर संघ ने इस प्रकल्प में पूरे देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है तो समूचा सभागृह करतल ध्वनि एवं गुरुदेव के जयघोष से गूंज उठा।

अतिथियों का स्वागत अमित नवलखा, सुभाष गोखरु एवं अन्य पदाधिकारियों ने किया। कार्यक्रम में समता संघ के बहूमंडल की कार्यकारिणी सहित सभी सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। संचालन पिंकेश पगारिया एवं ललित दुगड़ ने किया। शुभारंभ रामामृतम ध्यान साधना एवं समता शाखा आराधना के साथ हुआ।

कार्यक्रम के अगले चरण में शहर के उन 40 प्रख्यात चिकित्सकों का सम्मान किया गया जो साधु-साध्वी-भगवंतों की निष्काम सेवा में सदैव तत्पर बने हुए हैं। इसी तरह शहर की 70 किमी परिधि में सातों दिशाओं में विहार करने वाले साधु-साध्वी-भगवंतों की विहार के दौरान निष्काम सेवा में जुटे रहने वाले 78 परिवारों एवं जैन पाठशालाओं के उन 10 शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया जो बच्चों को धर्म-संस्कृति एवं जिन दर्शन की नियमित शिक्षा दे रहे

हैं।

 

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