असम के सुनहरे ‘मूंगा सिल्क’ पर बिखरा बिहार की मधुबनी कला का जादू…
– ग्रामीण हाट बाजार में ‘उमंग सिल्क एक्सपो’ का आयोजन
– 29 जून तक चलेगा एक्सपो, वेडिंग सीजन को देखते हुए खास छूट भी
इंदौर, । अपनी मजबूती और हर धुलाई के साथ और अधिक निखरने वाली चमक के लिए पहचाने वाले वाले असम के मूंगा सिल्क पर अगर बिहार की पारंपरिक मधुबनी की बारीक कारीगरी हो, तो नजरें बरबस ही उस तरफ टिक जाती है। दो प्राचीन कलाओं का ये अनूठा संगम इन दिनों ग्रामीण हाट बाजार में देखने को मिल रहा है। यहां चल रहे ‘उमंग सिल्क एक्सपो’ में इस काम को लेकर असम से बलराम आए हैं। मूंगा सिल्क की साड़ियों पर बिहार की लोक कला बारीक रेखाओं, प्राकृतिक रंगों और पौराणिक विषयों के साथ नजर आ रही हैं।
बलराम बताते हैं कि इसे तैयार करने वाले बुनकर मूंगा सिल्क पर मधुबनी के पारम्परिक और जीवंत रंगों से चित्रकारी करते है। 15 दिन में एक बुनकर एक साड़ी को तैयार करता है। आमतौर पर साड़ी पर पारंपरिक मधुबनी शैली में देवी-देवताओं, प्रकृति, लोक जीवन को महीनता से उकेरा जाता है, जिसमें ऊंट, हाथी, फूल तक शामिल होते हैं। शहर के ढक्कनवाला कुआं स्थित ग्रामीण हाट बाजार में चल रहे ‘उमंग सिल्क एक्सपो’ में यह खूबसूरत कलेक्शन देखने को मिल रहा है। एक्सपो के आयोजक आशीष गुप्ता ने बताया कि वेडिंग सीजन को देखते हुए यहां खरीदारी करने वालों को खास छूट भी दी जा रही है। पूरे देशभर की खासियत को लेकर यहां बुनकर आए हैं। बिहार, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, असम, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और जम्मू कश्मीर के अलग-अलग तरीके के पहनावे इस एक्सपो की शान बढ़ा रहे हैं। यह एक्सपो 29 जून तक सुबह 11 से रात 9 बजे तक चलेगा। यहां 20 स्टॉल पर कपड़ों के अलावा फर्नीचर और घर सजावट के सामान की भी अच्छी खासी रेंज मौजूद है। बनारसी साड़ियों का कलेक्शन लेकर सरफराज आए हैं। उनके पास हैंडलूम की प्योर बनारसी कतान सिल्क साड़ी पर हाथों की कढ़ाई किए हुए 10 हजार से लेकर 70 हजार तक की साड़ियों का कलेक्शन मौजूद है। एक्सपो में जयपुर का टेबल और सोफा कवर, दक्षिण भारत का कांजीवरम सिल्क भी मौजूद है, जिसमें रेशम से ही कढ़ाई का बारीक काम किया गया है। इस साड़ी को तैयार होने में 1 कारीगर 6 महीने का वक्त लेता है। एक स्टॉल पर असम का ही प्राकृत मलबरी टसर सिल्क भी मौजूद है।
एक्सपो में जयपुर की मशहूर नीली और आसमानी चमकदार कलाकृतियों के लिए मशहूर कला को लेकर अजय आए हैं। कहते हैं कि चीनी मिट्टी से तैयार इन कलाकृतियों में कई चीजें शामिल होती है। सबसे खास छोटे जूलरी बॉक्स हैं, जिन्हें अलग-अलग डिजाइन में हैंड पेंट करके तैयार किया जाता है। इसमें मशीन का इस्तेमाल बिलकुल नहीं किया जाता। अजय के पास घर सजाने से लेकर कई अन्य तरीके के सामान भी मौजूद है। अजय बताते हैं कि ब्लू पॉटरी के बर्तन पर पहले व्हाइट कोटिंग होती है। फिर इस पर हाथ से ही अलग-अलग कलाकृति और पेंटिंग बनाई जाती है। कलाकृति में फूल पत्तियां, बेल बूटे, पक्षी, राजस्थानी आकृतियों और पारंपरिक डिजाइन हाथों से उकेरे जाते हैं। रंगों के लिए स्टोन कलर का इस्तेमाल किया जाता है। ब्लू पॉटरी में मुख्य तौर पर बाउल, प्लेट कटोरी, परात और गमले तैयार होते हैं। जयपुर की ब्लू पॉटरी एक हस्तशिल्प नहीं बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक आत्मा का हिस्सा है। इसके हर रंग में इतिहास बसता है। हर डिजाइन में परंपरा झलकती है।
असम के सुनहरे ‘मूंगा सिल्क’ पर बिखरा बिहार की मधुबनी कला का जादू… – ग्रामीण हाट बाजार में ‘उमंग सिल्क एक्सपो’ का आयोजन
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