मां नर्मदा के निकट जाना नहीं पड़ता है मां नर्मदा स्वयं अपने भक्तों कों अपने पास बुलाती है मानो मां नर्मदा मां चयन करती है अपने भक्तों का कि कौन
भक्ति की पराकाष्ठा होने पर दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है जिन्हें यह प्राप्त होती है वह ज्योतिर्लिंग को अग्नि स्तंभ के रूप में देख सकते है याने हमारे देश में
आधुनिक युग में मां नर्मदा को चाहे मात्र एक नदी माना जाए लेकिन आज भी नर्मदा का आध्यात्मिक महत्व जानने वाले मां नर्मदा के नदी नहीं शक्ति मानते है। मां
मां नर्मदा के उदगम स्थल अनूपपुर जिले में स्थित अमरकंटक के घने जंगलों में माँ नर्मदा मंदिर स्थित है इस मंदिर से लगभग 1 किमी दूर बन रहा है रहस्यमयी
शहर के पश्चिम क्षेत्र में आस्था और उल्लास का चार दिनी संगम मंगलवार से रणजीत हनुमान मंदिर में शुरू हो गया। यहां पहले दिन ध्वजा रोहण के साथ अष्टमी महोत्सव
आदियोगी शिव जो कि हजारों वर्षों तक योग मुद्रा में लीन रहते है। उनके ध्यान को तोड़ना किसी के बस में नहीं है। उस योगनिंदा को तोड़ने के लिए वर्षों
हिंदू धर्म में महिनों का भी महत्व है। जैसे श्रावण माह शिव को अत्य़ंत प्रिय होता है ऐसे ही पौष माह में सूर्य आराधना का महत्व है। वैसे इस माह
इंदौर के खंडवा रोड पर स्थित शिवनगर पिपलिया लोहार का संकट मोचन हनुमान मंदिर और संस्कार केंद्र खेड़ापति आश्रम आज एक महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक क्षण के स्वागत के लिए
दत्तात्रेय की योगधारा से लेकर शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन तक — दण्डी संन्यासी परंपरा भारतीय आत्मा का सनातन प्रकाश है। पूरा लेख पढ़ें और जानें इस दिव्य परंपरा का रहस्य










