धर्म का काम ढिंढोरा पीट कर करना चाहिए –सुधासागर म. सा.
दलाल बाग़ के विशाल सत्संग सभा मंडप में चातुर्मास की महती धर्म सभा में राष्ट्र संत के प्रेरक आशीर्वचन
इंदौर। पाप कर्म छिपकर किया जाता है लेकिन धर्म का काम ढिंढोरा पीट कर करना चाहिए। यदि हम धर्म का काम कर रहे हैं तो किसी का डर नहीं होना चाहिए। जीवन में हमेशा सकारात्मक शक्ति अर्जित करना चाहिए । ज्ञानी व्यक्ति संसार में कुछ बुरा नहीं देखता, लेकिन आप ज्ञानी है इसका निर्णय कैसे करेंगे। हमें कोई मूर्ख कहेगा तो बुरा लगेगा लेकिन ज्ञानी कहेगा तो अच्छा लगेगा। बुरा शब्द हमेशा बुरा ही होता है। कोई भी व्यक्ति बुरा शब्द सुनना नहीं चाहता।पापी को पापी कहना कभी कभी खतरनाक साबित हो सकता है। वह सोचेगा कि मुझे ही क्यों पापी कहा जा रहा है। इसीलिए हमारी वाणी और शब्दों का प्रयोग सही होना चाहिए। गलती करना कमज़ोरी नहीं है, गलती करने के बाद गलती नहीं मानना ये सबसे बड़ी कमजोरी है।
ये प्रेरक और दिव्य विचार है संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के जो उन्होंने शनिवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल सत्संग सभा मंडप में आयोजित चातुर्मास की महती धर्म सभा में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को आर्शिवचन देते हुए व्यक्त किये। धर्म सभा मे देशभर से आए हजारों समाज बंधु मौजूद थे।प्रारम्भ में आयोजन समिति की ओर से चक्रवर्ती मनीष – सपना गोधा, नवीन -शिवानी गोधा, आनंद-अंतिका गोधा, हर्ष जैन , आकाश जैन कोयला ने सभी साधकों की अगवानी की । संयोजक मनीष गोधा , हर्ष जैन , आकाश जैन कोयला ने बताया कि चातुर्मास में प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी होंगे।
राष्ट्र संत प. पू . सुधासागर म. सा . ने अपने आशीर्वचन में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में दुःख आता ही है। प्रभु श्री राम के जीवन में भी दुःख आया। हमारी आदत नहीं है कि हम चाहे जितने बुरे हो लेकिन अपनी बुराई सुनना नहीं चाहते, यही हमारी सबसे बड़ी ग़लती है क्योंकि जो व्यक्ति हमारी बुराई कर रहा है वह बहुत अच्छा होता है। बुराई होने पर भी सहज बने रहेंगे तो यही से मोक्ष का मार्ग शुरू हो जाएगा। जीवन में नियम लें कि किसी के बुरा कहने पर भी कोई प्रतिकार नहीं करेंगे और मन में कोई विकल्प नहीं लायेंगे तभी हम ज्ञानी कहलायेंगे। जिस प्रकार आज कल कचरे से खाद बनायी जाती है, उसी प्रकार अपने जीवन की बुराईयों और कचरे का उपयोग खाद बना कर करते रहे। प्रभु श्री राम के जीवन में भी रावण जैसा गंदा आदमी आया था और रामजी ने उसे ही खाद बना कर अपने जीवन की खेती को संवार दिया।



