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जिस दिन देश में राजा की ओर  से धर्म और धर्मात्माओं पर कोई पाबंदी नहीं होगी,उस दिन रामराज्य की स्थापना हो जाएगी – राष्ट्र संत प. पू. सुधासागर म. सा

जिस दिन देश में राजा की ओर  से धर्म और धर्मात्माओं पर कोई पाबंदी नहीं होगी,उस दिन रामराज्य की स्थापना हो जाएगी 

राष्ट्र संत प. पू. सुधासागर म. सा

दलाल बाग़ के विशाल सत्संग सभा  मंडप में चातुर्मास की महती धर्म सभा में राष्ट्र संत प. पू. सुधासागर म. सा. के प्रेरक आशीर्वचन

 

इंदौर।  जिस दिन धर्म और धर्मात्माओं पर कोई पाबंदी नहीं होगी , उस दिन राष्ट्र और समाज में हरियाली बढ़ जाएगी और जिस दिन कोई राजा धर्म और धर्मात्माओं पर टैक्स लगा देगा , उसी दिन से राष्ट्र के पतन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। धर्म  और धर्मात्मा के यहां कभी डाका  मत डालना । कोई व्यक्ति यदि ऐसा करेगा तो बर्बाद हो जाएगा। धर्म के काम  में किसी तरह का डर नहीं होना चाहिए। आज परिवार में ऐसे बेटों की जरूरत है जो धार्मिक कार्यों में पिता द्वारा दान की गई घोषणा पर खुद अमल करे। शास्त्रों मे भी उल्लेख है कि जो लोग उपवास व दान करें , उनकी प्रभावना करना चाहिए।  देश में रामराज्य की स्थापना तभी होगी जिस दिन देश में राजा की ओर से धर्म और धर्मात्माओं पर किसी तरह की पाबंदी नहीं होगी।

संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज ने  शुक्रवार को  सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल सत्संग सभा मंडप में आयोजित चातुर्मास की महती धर्म सभा में उक्त दिव्य और ओजस्वी विचार व्यक्त किये। धर्म सभा मे आज भी देशभर से आए हजारों समाज बंधु मौजूद थे। प्रारम्भ में राष्ट्रसंत  को शास्त्र भेंट करने का लाभ छत्रपति नगर दिगंबर जैन समाज ने लिया। श्रीफल अर्पित करने का सौभाग्य अभिषेक – प्रीति,  तनिष्क – आयांश  जैन रानीपुरा वाले ने प्राप्त किया। आयोजन समिति की ओर से मनीष – सपना गोधा, चक्रवर्ती नवीन -शिवानी गोधा, आनंद-अंतिका गोधा,  हर्ष जैन , आकाश जैन कोयला ने  सभी साधकों की अगवानी की । मंगलाचरण निहारिका जैन ने किया। दीप प्रज्वलन का सौभाग्य अमित राकेश जैन नवकार परिवार को मिला । संचालन अनुराग जैन ने किया । संयोजक मनीष  गोधा , हर्ष जैन , आकाश जैन कोयला ने  बताया कि चातुर्मास में प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी होंगे।

राष्ट्र संत प. पू . सुधासागर म. सा . ने अपने आशीर्वचन में कहा कि जिंदगी छोटी नहीं है , इसे  हम असीम बना सकते है।  हम सबको जिंदगी से प्यार होना चाहिए। जिंदगी हमारी सोच से भी  कहीं अधिक  है ।जन्म से पहले , मरने  के बाद भी जिंदगी है। जीवन में हमेशा यह विचार मन मे रखें कि मरने के बाद भी मेरी जिंदगी रहेगी।  जिंदगी का कोई अंत नहीं है। कोई व्यक्ति किसी तंत्र  मंत्र से अमर नहीं हो सकता। जब तक हम दुखी नहीं होंगे ,  तब तक हमें सुख का अनुभव नहीं होगा। चातुर्मास का कोई मोल नहीं होता । सुधा के सागर का पानी अनमोल होता हैं।  सागर के जल से भी जो प्यास नहीं बुझती वह गुरु के एक बूंद पानी से बुझ सकती हैं। मेरी रोटी अनमोल है। वह उसी को मिलेगी जो  अपना सब कुछ त्याग कर सकता है। गुरु हमें जो देंगे वह अनमोल होगा।  याद रखें कि  व्यक्ति को करोड़पति बनने के  लिए भारी मेहनत लगती है।  कई पीढ़ियां लग जाती हैं ,इसलिए धर्म को रोटी के समान मत खरीदो । मजदूर की कमाई पसीने की है जो उसकी शुद्ध कमाई है।

गुरु की महत्ता बताते हुए राष्ट्र संत ने कहा कि मैं अपने भक्तों को यही कहना चाहता हूं कि धर्म का काम करने में कभी डरना मत । आपका परिवार भी  आपके काम  में सहयोग करेगा।  याद रखना कि भूख  है तो रोटी की कीमत है । प्यास है तो पानी की कीमत है । दुख के  खेत में  धर्म की  खेती करना भी  धर्मकार्य कहलाएगा । जब तक किसी काम के प्रति तुम्हारे मन में तड़प और लगन नहीं होगी, तब तक उसकी कीमत समझ नहीं आएगी।

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