Surajkund Narmada Parikrama

दत्ता श्री अवधेश चैतन्य जी महाराज की नर्मदा परिक्रमा: दिन 14 की यात्रा में आशीर्वाद और भक्ति की झलक

महाराज जी की यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत साधना का उदाहरण है, बल्कि हजारों अनुयायियों को प्रेरित भी कर रही है। नर्मदा परिक्रमा की परंपरा प्राचीन है, जहां भक्त नदी के चारों ओर घूमकर अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं। ऐसे में दत्ता श्री अवधेश चैतन्य जी महाराज की यह यात्रा धार्मिक उत्साह को बढ़ावा दे रही है।
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दिव्यभूमि ब्लॉग, 18 नवंबर 2025 – पवित्र नर्मदा नदी की परिक्रमा, जो हिंदू धर्म में आध्यात्मिक शुद्धि और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है, एक बार फिर सुर्खियों में है। दत्ता श्री अवधेश चैतन्य जी महाराज अपनी कठिन 3,400 किलोमीटर की पैदल यात्रा के 14वें दिन में आगे बढ़ रहे हैं। यह परिक्रमा आमतौर पर 3 से 6 महीनों तक चलती है और लाखों भक्तों को आकर्षित करती है, जो नर्मदा मां की कृपा प्राप्त करने के लिए इसमें भाग लेते हैं।

Surajkund Narmada parikrama Kumbhalgarh rajasthan

यात्रा का यह चरण छोटा वर्धा गांव से शुरू होकर अनवाली घाट तक पहुंचा। सेगावन के प्रसिद्ध नकुन वाले बाबा आश्रम पर रुकावट एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। नकुन वाले बाबा, जो दशकों से अपनी कठोर तपस्या के लिए जाने जाते हैं—जिसमें उनके कभी न कटने वाले नाखून शामिल हैं—ने महाराज जी और उनके साथी तीर्थयात्रियों को आशीर्वाद दिया।

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यह परंपरा कम से कम 2021 से नर्मदा परिक्रमा की कहानियों में दर्ज है, जो स्थानीय लोगों के बीच गहरी श्रद्धा को दर्शाती है।फोटोज में केसरिया वस्त्रों में सजे तीर्थयात्री नदी किनारे पर ध्यानमग्न दिखाई दे रहे हैं।

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महाराज जी की यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत साधना का उदाहरण है, बल्कि हजारों अनुयायियों को प्रेरित भी कर रही है। नर्मदा परिक्रमा की परंपरा प्राचीन है, जहां भक्त नदी के चारों ओर घूमकर अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं। ऐसे में दत्ता श्री अवधेश चैतन्य जी महाराज की यह यात्रा धार्मिक उत्साह को बढ़ावा दे रही है।

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