यह यात्रा न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी भक्तों को मजबूत बना रही है, जहां प्रकृति की गोद में नर्मदा मां के दर्शन से आत्मा की
आज की यात्रा बालाजी रोकड़ा हनुमान मंदिर से शुरू हुई, जो राजघाट के निकट स्थित है। यहां से आगे बढ़ते हुए दाता श्री और उनके साथी भक्तों ने दिगंबरदास बाबा
महाराज जी की यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत साधना का उदाहरण है, बल्कि हजारों अनुयायियों को प्रेरित भी कर रही है। नर्मदा परिक्रमा की परंपरा प्राचीन है, जहां भक्त नदी
पवित्र नर्मदा नदी की परिक्रमा में संलग्न दाता श्री की यात्रा का 13वां दिन अत्यंत उत्साह और भक्ति से भरपूर रहा। इस आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत मध्य प्रदेश के लोहारा
पुराणों के अनुसार, इस परिक्रमा को 12 करोड़ अन्य पवित्र स्थलों की परिक्रमा के बराबर पुण्यदायी माना जाता है, जो इस यात्रा की महानता को बढ़ाता है। मध्य प्रदेश और
सूरजकुंड, 15 नवंबर 2025 (दिव्यभूमि न्यूज): हिंदू धर्म की पवित्र परंपराओं में नर्मदा परिक्रमा एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा मानी जाती है, जो भक्तों को आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की ओर
नर्मदा परिक्रमा के नौवें दिन का शुभारंभ ढालखेड़ा अन्नपूर्णा आश्रम से हुआ, जिसका नेतृत्व सूरजकुंड के महामहिम दाता श्री अवधेश चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज कर रहे हैं। दक्षिणी तट (दक्षिण
Surajkund Kumbhalgarh अरावली की गोद में बसा सुरजकुंड, कुम्भलगढ़ — जहाँ प्रकृति और अध्यात्म का संगम है। पांडवकालीन कुंड, दत्तात्रेय भगवान का स्थल और श्री अवधेश चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज
राजस्थान, राजसंमंद जिले में कुंभलगढ़ के निकट ही स्थित है सुरजकुंड एक दैविक प्राकृतिक स्थल जहां पहुंचना तो आमजन के लिए आसान नहीं है लेकिन इस स्थल तक पहुंचने के










