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जीवन की नकारात्मकता को दूर करता है होलिका दहन, क्यों आवश्यक है की परिक्रमा?

इंदौर। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा। होलिका की अग्नि को बहुत ही पवित्र और ऊर्जा से भरपूर माना जाता है, जिसमें हमारे जीवन की नकारात्मकता को दूर करने की शक्ति होती है। बुजुर्गों का कहना है कि अग्नि की परिक्रमा करना केवल एक धार्मिक रीत नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के प्रति अपना आभार जताने और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने का एक तरीका है।

तीन या सात परिक्रमा का ऐसा है महत्व
आमतौर पर शास्त्रों के अनुसार अग्नि की तीन या सात बार परिक्रमा करना सबसे शुभ माना जाता है। तीन की संख्या को त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सम्मान में उत्तम माना जाता है, जबकि सात परिक्रमाएं हमारे जीवन के सात चक्रों की शुद्धि का संकेत देती हैं। सही संख्या में और शांत मन से की गई परिक्रमा मन के भीतर छिपे डर और आशंका को दूर करने में बहुत सहायक सिद्ध होती है, जिससे मानसिक बल मिलता है।

होलिका में नई फसल का किया जाता है दान
परिक्रमा पूरी होने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ न कुछ दान करना बहुत पुण्यकारी माना गया है। होलिका की अग्नि में नई फसल के अनाज या गेहूं की बालियों को अर्पित करना सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है। इससे घर में कभी अन्न और धन की कमी होने की आशंका नहीं रहती और बरकत बनी रहती है।

ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करती है अग्नि
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन किया गया दान ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करता है और सुखद फल मिलने का मार्ग बनाता है। घर में हमेशा बरकत और खुशहाली बनी रहती है।

ऐसे करें होलिका की परिक्रमा
परिक्रमा शुरू करने से पहले अपने हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान का ध्यान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, अग्नि की परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में ही करनी चाहिए, इसे ही शुभ माना गया है। परिक्रमा पूरी होने के बाद अग्नि देव को हाथ जोड़कर प्रणाम करें और अपने परिवार की सुख-सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें। विधि-विधान से की गई यह परिक्रमा पितरों का आशीर्वाद दिलाती है और पिता की संपत्ति व सुख में वृद्धि का मार्ग खोलती है।

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