इंदौर। समाज को संस्कारित करने के लिए परिवार पहली श्रेणी में आता है इसके लिए इंदौर से राष्ट्रीय व्यापी दिव्य संतान प्रकल्प गर्भ संस्कार की शुरुआत होने जा रही है, सशक्त भारत और स्वस्थ समाज के इस नवाचार के लिए 1 फरवरी को डेली कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वरिष्ठ पदाधिकारी भैया जी जोशी और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में शंखनाद किया जाएगा।
गर्भसंस्कार विज्ञान पर सेमिनार
दिव्य संतान प्रकल्प के राष्ट्रीय संयोजक, पूर्व राज्य मंत्री दर्जा डॉ योगेंद्र जी महंत ने बताया कि 1 फरवरी को होने वाले इस कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय भैया जी जोशी (निवृत्तमान सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में होगा। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में गर्भसंस्कार विज्ञान पर सेमिनार आयोजित किया जाएगा।
इसके पश्चात दिव्य दंपत्तियों को स्वस्थ एवं श्रेष्ठ संतान हेतु गर्भसंस्कार के पालन का संकल्प दिलाया जाएगा तथा समाज के प्रबुद्ध जनों द्वारा इस विज्ञान को जन-जन तक, घर-घर तक पहुँचाने का संकल्प लिया जाएगा। इस अवसर पर डॉक्टर अनिल गर्ग एवं डॉ सीमा गर्ग के द्वारा संकलित गर्भ संस्कार विषय पर पुस्तक का विमोचन भी किया विषय विशेषज्ञ विज्ञान सम्मत प्रस्तुति सभी के बीच रखेंगे।
विज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का समागम….
दिव्य संतान प्रकल्प के राष्ट्रीय संयोजक पं. डॉ योगेन्द्र महंत श्रेष्ठ संतान के माध्यम से ही हम परिवार को सुदृढ़, समाज एवं राष्ट्र को स्वस्थ, सशक्त, सुरक्षित एवं समृद्ध बना सकते हैं तथा विश्व मे प्रेम, करुणा एवं शांति की पुनर्स्थापना कर सकते हैं। 1 फरवरी 2026 को इंदौर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज ऑडिटोरियम संस्कृति, विज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के अनूठे समन्वय का साक्षी बनने हेतु एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
यह कार्यक्रम है— “गर्भसंस्कार के विश्वव्यापी अभियान हेतु शंखनाद”।गर्भसंस्कार, गर्भस्थ शिशु के लालन-पालन, शिक्षण एवं प्रशिक्षण का विज्ञान-आधारित कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत गर्भस्थ माता गर्भधारण से पूर्व से लेकर संपूर्ण गर्भावस्था के दौरान संयमित जीवनचर्या, संतुलित आहार, शुद्ध आचार-विचार एवं रहन-सहन अपनाती है, जिससे शिशु को उत्तम पोषण, समुचित देखभाल तथा मस्तिष्क के स्वस्थ विकास हेतु अनुकूल वातावरण प्राप्त होता है।इस प्रक्रिया में गर्भस्थ माता अपने स्त्री-रोग विशेषज्ञ अथवा चिकित्सक के संपर्क में रहते हुए गर्भसंस्कार विशेषज्ञ से परामर्श लेती है। इस परामर्श में खान-पान, योग, ध्यान, संगीत, मंत्र, कुछ भाषाओं का अध्ययन, पूजा-पाठ एवं संयमित जीवनशैली की जानकारी दी जाती है। इतिहास में अभिमन्यु, भक्त प्रहलाद गर्भसंस्कार के ही उदाहरण हैं।


