इंदौर(विनोद गोयल)। शहर में जोर-शोर से चल रहे तीन दिवसीय आदिवासी आयोजन ‘जात्रा-2026’ ने दूसरे दिन ऐसा रंग जमाया कि पूरा इंदौर आदिवासी सुरों पर थिरकता नजर आया। शाम 7 बजे से 10 बजे तक आनंदीलाल भावेल और उनकी टीम की लाइव म्यूजिकल नाइट ने माहौल को उत्सव में बदल दिया और झाबुआ, अलीराजपुर की संस्कृति को इंदौर की सरज़मीं पर उतार दिया।
‘अमू काका बाबा’, ‘चिलम तमाखू का डब्बा’, ‘क्यों मारी रे, क्यों पीटी रे’, ‘छोटी-सी उमर में म्हारी शादी कराई दी’ जैसे लोकप्रिय गीतों पर शहर का युवा वर्ग झूम उठा। पारंपरिक वेशभूषा, मांदल की थाप और लोकधुनों की गूँज ने शहर और जनजातीय अंचलों के बीच की दूरी को मानो पूरी तरह मिटा दिया।
जात्रा-2026′ आदिवासी संस्कृति
इंदौर के ऐतिहासिक गांधी हॉल परिसर में 20 से 22 फरवरी तक आयोजित ‘जात्रा-2026’ आदिवासी संस्कृति के साथ उस जीवनदृष्टि को सामने ला रही है, जहाँ स्वास्थ्य और प्रकृति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में धार, झाबुआ और अलीराजपुर की प्रमुख औषधियाँ और वनोपज यहाँ विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
जनसहभागिता की सराहना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी समापन वाले दिन जात्रा में शामिल होंगे और आयोजन को सफल बनाएँगे। झाबुआ की कलेक्टर नेहा मीना भी आयोजन स्थल पर पहुँचीं और कलाकारों व स्टॉल धारकों से संवाद किया। जनजातीय प्रतिभाओं को इंदौर तक लाने में उनका सहयोग विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं और जनसहभागिता की सराहना की। क्षेत्र क्रमांक 3 के विधायक गोलू शुक्ला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की उपस्थिति के साथ केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सावित्री ठाकुर की मौजूदगी ने भी आयोजन की गरिमा बढ़ाई। महाकाली एजेंसी के एमडी अमित अग्रवाल का सावित्री ठाकुर समेत मीडिया ने स्वागत किया।

जात्रा-2026′ युवाओं के लिए खास आकर्षण
जात्रा-2026′ युवाओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन गया है। बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्र-छात्राएँ स्थल पर पहुँच रहे हैं। सेल्फी पॉइंट पर दिनभर युवाओं की भीड़ उमड़ी हुई है, जहाँ पारंपरिक सजावट और जनजातीय कला के साथ तस्वीरें खिंचवाने का उत्साह देखते ही बन रहा है। आयोजन परिसर में गौ माता की गोसेवा का विशेष प्रबंध भी किया गया है, जो सांस्कृतिक आयोजन को आध्यात्मिक स्पर्श देने का काम कर रहा है।
वनोपज और पारंपरिक उत्पाद
स्टॉल्स की बात करें, तो इस बार वनोपज और पारंपरिक उत्पाद खासा ध्यान खींच रहे हैं। शुगरफ्री हनी के स्टॉल पर स्वास्थ्य के प्रति सजग लोगों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। झाबुआ के प्रसिद्ध ‘गुड़ियाघर’ का स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहाँ हाथ से बने गुड्डे-गुड़िया और पारंपरिक तीर-कमान ने बच्चों और बड़ों दोनों का मन मोह लिया। झाबुआ और अलीराजपुर से आए जनजातीय समूहों की भागीदारी इस आयोजन को और प्रामाणिक बना रही है।
सांस्कृतिक विरासत है आदिवासी सभ्यता
“सांस्कृतिक विरासत को शहर में लेकर आना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। होली से पहले ही अपनी तरह का अलग उत्सव शहर में देखने को मिल रहा है। पूरा अलीराजपुर, धार, झाबुआ इंदौर में बस गया है, ऐसा प्रतीत हो रहा है। खाट पर बैठकर दाल-पानिए का स्वाद, गाँव की संस्कृति और रहन-सहन का इंदौरी भरपूर लुत्फ उठा रहे हैं। देवकीनंदन तिवारी जी और उनकी टीम का योगदान सराहनीय है। सभी को शुभकामनाएँ।”

हम एक हैं, हमारा देश एक
कार्यक्रम में नई दिल्ली मंच से उपस्थित रहीं महामंडलेश्वर दे माँ पवित्रानंद गिरी राजेंद्र आचार्य ने कहा, “जनजातीय सामाजिक सेवा समिति द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम अपने आप में अद्भुत और अनूठा कार्यक्रम है। हम एक हैं, हमारा देश एक है, इसलिए सबसे ज्यादा आवश्यक है कि हम सभी एक-दूसरे को साथ लेकर चलें, जात्रा इसका जीवंत उदाहरण है।”
म्यूजिकल नाइट के पार्टनर के रूप में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ के मैनेजिंग डायरेक्टर अक्षय कांतिलाल बम विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, ‘फेस ऑफ इंडिया’ के रूप में मशहूर और कई ब्रांड्स के लिए मॉडलिंग कर चुकीं इंदौर की निश्चला धारवा ‘जात्रा-2026’ का भी फेस रहीं। उनकी उपस्थिति ने युवाओं में खास उत्साह भर दिया।
कला और संगीत को शहर के हृदय तक पहुँचाया
जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के अध्यक्ष देवकीनंदन तिवारी ने कहा, “जिस प्रकार दूसरे दिन युवाओं और शहरवासियों की भागीदारी देखने को मिली, उससे स्पष्ट है कि ‘जात्रा-2026’ अब सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन का रूप ले रहा है। हमारा उद्देश्य था कि जनजातीय संस्कृति, कला और संगीत को शहर के हृदय तक पहुँचाया जाए, हम इसमें सफल रहे हैं।”
नई ऊँचाइयों तक ले जा रहा
समिति के कोषाध्यक्ष गिरीश चव्हाण ने कहा, “म्यूजिकल नाइट और दिनभर की गतिविधियों ने यह सिद्ध कर दिया कि ‘जात्रा-2026’ हर आयु वर्ग के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। युवाओं की ऊर्जा, कलाकारों का समर्पण और जनप्रतिनिधियों का सहयोग इस आयोजन को नई ऊँचाइयों तक ले जा रहा है।”
तीन दिवसीय ‘जात्रा-2026’ अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, लेकिन जिस तरह से युवाओं का सैलाब, संगीत की धुन और जनजातीय रंग एक साथ दिखाई दे रहे हैं, उससे यह आयोजन लंबे समय तक इंदौर की सांस्कृतिक स्मृतियों में गूँजता रहेगा।


