Narmada

मंत्री प्रहलाद पटेल की प्रेरणा से ‘प्रतिज्ञा’ ने शुरू की मां नर्मदा परिक्रमा

भक्ति की शक्ति कैसे जागती है इसका एक उदाहरण बनी है प्रतिज्ञा सिंह पटेल जो पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की बेटी है। इन्होने 1330 किलोमीटर लंबी नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत की है। प्रतिज्ञा सिंह में मां नर्मदा की भक्ति तो अपने पिता से ही सीखी थी। अपने घर में अपने पिता के मां नर्मदा के प्रति कार्यों को देख कर प्रतिज्ञा ने भी मां नर्मदा परिक्रमा करने की ठान ली। लेकिन यह परिक्रमा सिर्फ अध्यात्म के लिए ही नहीं है। यह परिक्रमा होगी मां नर्मदा के संरक्षण का संदेश देने के लिए, मां नर्मदा की व्यथा को उकेरने की जो कलयुग में प्रदुषण का झेल रही है लेकिन अपने निर्मल जल से जगत की जीवनदायिनी बनी है लेकिन फिर भी सांसारिक लोग अपने फायदे के लिए इसे ही नष्ट कर रहे है। मानों हम उसी डाल को काट रहे है जिस पर हम बैठे है।
अमरकंटक में रूक कर बनाई पेंटिग
अमरकंटक में परिक्रमा शुरू करने से पूर्व प्रतिज्ञा ने नर्मदा मंदिर में पूजा अर्चना की तथा मंदिर परिसर के सभी मंदिरों में जाकर मत्था टेका। परिक्रमा की शुरूआत के  साथ ही प्रतिज्ञा कुछ दिन अमरकंटक में रूकेगी तथा माई की बगिया सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों का चित्रांकन करेंगी। बताया जा रहा है कि वे लगभग दो वर्षों में नर्मदा परिक्रमा पूर्ण करेंगीं। इस दौरान प्रतिज्ञा नर्मदा नदी के दोनों तटों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृश्यों को चित्रों के माध्यम से संजोएंगी। प्रतिज्ञा का कहना हैकि अपनी इस यात्रा और चित्रों के माध्यम से वे लोगों को नर्मदा मैया के संरक्षण और स्वच्छता का संदेश देंगी।

प्रतीज्ञा बनाएंगी 7 किलोमीटर लंबी पेंटिंग
अमरकंटक से लेकर मां नर्मदा के अरब सागर में संगम तक के संपूर्ण सफर को प्रतिज्ञा सिंह पटेल चित्रांकन के माध्यम से प्रस्तुत करेंगी। इस यात्रा के हर 150 किलोमीटर के दृश्यों को एक किलोमीटर लंबी पेंटिंग में उकेरा जाएगा। अमरकंटक, ओंकारेश्वर जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के लिए डेढ़ से दो किलोमीटर तक की पेंटिंग बनाई जाएगी। इस प्रकार पूरी नर्मदा परिक्रमा को लगभग सात किलोमीटर लंबी पेंटिंग में रूपांतरित करने की तैयारी है। पेंटिंग से जुड़े उपकरणों और आवश्यक सामग्री के लिए एक विशेष रूप से तैयार मिनी ट्रक भी यात्रा के दौरान चलेगा।

कठिन क्षेत्रों में ऐसे बनेगी पेंटिंग
परिक्रमा के दौरान नर्मदा किनारे जहां पहुंचना कठिन होगा, वहां ड्रोन के माध्यम से वीडियो और फोटोग्राफी कराई जाएगी, जिसके आधार पर चित्र बनाए जाएंगे। प्रतिज्ञा ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी पेंटिंग में एक्रेलिक या सिंथेटिक रंगों के बजाय पर्यावरण-अनुकूल पत्थरों, गोंद और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से बने रंगों का उपयोग करेंगी।

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश
इस नर्मदा परिक्रमा का मुख्य उद्देश्य नर्मदा मैया के प्रति आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जन-जागरुकता लाना है। प्रतिज्ञा का कहना है कि प्राचीन काल में लोग नर्मदा को स्वच्छ रखने के लिए तांबे के सिक्के और कपास के वस्त्र प्रवाहित करते थे, जो प्रकृति के अनुकूल थे। आज प्लास्टिक और कृत्रिम वस्तुएं नदी के प्रदूषण का कारण बन रही हैं।

 

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