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“क्यों रूठे हुए हैं मेघराज मालवांचल से” संस्था सेवा सुरभि द्वारा कल पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के आतिथ्य में होगा मंथन

सेवा सुरभि,

 

“क्यों रूठे हुए हैं मेघराज मालवांचल से” संस्था सेवा सुरभि द्वारा कल पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के आतिथ्य में होगा मंथन

इंदौर। राष्ट्र, संस्कृति और प्रकृति से सरोकार रखने वाली सामाजिक संस्था सेवा सुरभि ने मालवांचल में रूठे हुए मेघराज और किसानों के माथे पर पानी की जगह पसीने की बूंदे टपकने के हालात पर चिंतन और मंथन करने के उद्देश्य से शुक्रवार 7 अगस्त को अपराह्न 4.30 बजे से साउथ तुकोगंज, पंजाब अरोड़वंशीय भवन के सामने स्थित होटल कलिंगा पर पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी से आत्मीय वार्तालाप करने का कार्यक्रम संजोया है।

संस्था के संयोजक ओमप्रकाश नरेडा, पर्यावरणविद ओपी जोशी, अतुल शेठ एवं कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि देश के अन्य राज्यों में झमाझम वर्षा हो रही है लेकिन हमारे अपने मालवांचल में प्रकृति रूठी हुई नजर आ रही है। हरियाली के सजग प्रहरी और प्रेरक पद्मभूषण डॉ. जोशी को इस हालात में आत्मीय वार्तालाप के लिए आमंत्रित किया गया है। डॉ. जोशी के साथ शहर के पर्यावरण प्रेमी, जागरूक नागरिक और हरियाली से जुड़े प्रेमी बातचीत कर पूरे देश का पर्यावरण बिगड़ने, टेक्नोलॉजी में लगातार आगे बढ़ने के बावजूद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आम आदमी की उदासीनता और प्रकृति की अवहेलना जैसे मुद्दों पर मंथन करेंगे। कार्यक्रम में पद्मश्री जनक पलटा, भूगर्भ जल विशेषज्ञ डॉ. सुधीन्द्र मोहन शर्मा, केट के पूर्व वैज्ञानिक निकेतन सेठी, वरिष्ठ अभिभाषक अनिल त्रिवेदी, डॉ. किशोर पंवार, डॉ. भोलेश्वर दुबे, डॉ. दिलीप वाघेला, पंकज कासलीवाल सहित शहर के अनेक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

डॉ. जोशी का परिचय – डॉ. अनिल प्रकाश जोशी एक पर्यावरणविद, हरित कार्यकर्ता और हिमालयन पर्यावरण अध्ययन और संरक्षण संगठन (HESCO) के संस्थापक हैं, जो देहरादून स्थित एक स्वैच्छिक संगठन है। उनके काम में प्रमुख रूप से स्थायी प्रौद्योगिकियों का विकास शामिल है जो पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए पारिस्थितिकी समावेशी अर्थव्यवस्था हैं। उन्होंने जीईपी (सकल पर्यावरण उत्पाद) गढ़ा है, जो जीडीपी के समानांतर एक पारिस्थितिक विकास उपाय है। जीईपी को 5 जून 2021 को उत्तराखंड राज्य द्वारा विकास उपाय के रूप में स्वीकार किया गया है। उन्हें 2003 में वीक मैगजीन द्वारा मैन ऑफ द ईयर चुना गया है। वे जमनालाल बजाज पुरस्कार से भी अलंकृत हो चुके हैं। भारत सरकार ने उन्हें भारतीय समाज में उनके योगदान के लिए 2006 में पद्मश्री के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया और 2020 में उन्हें उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण के लिए तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया।

 

 

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