स्वयं की किस्मत बदलने की ताकत हमारे ही हाथों में – राष्ट्रसंत सुधासागर म.सा.
दलाल बाग में चल रहे चातुर्मास की विशाल धर्मसभा में प्रेरक आशीर्वचन – दिनोंदिन जुट रहा साधकों का मेला
इंदौर,। जो चमत्कार करने की क्षमता भगवान और गुरु में है, वह भक्तों में भी हो सकती है। कई बार ऐसे अवसर आते हैं जहाँ न तो भगवान होते हैं, न ही गुरु, तब ऐसे समय में हमारी किस्मत कौन पलटेगा। ध्यान रखना कि जीवन में अकस्मात आने वाली विपदा से बचने के लिए अभी से एक भगवान और एक गुरु की आराधना शुरू कर दो। जिसका जीवन में कोई गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं। कभी भी अपने जीवन में अपना गुरु मत बदलना। संकल्प करें कि जीवन में कभी नमोकार महामंत्र नहीं छोडूंगा। जिस दिन हम सच्चे भक्त बन जाएँगे, उस दिन स्वयं की किस्मत बदलने की ताकत भी हमारे ही हाथों में होगी। भगवान के चरणों की नहीं, चरणों की रज से ही सब काम हो जाते हैं। हमें संकल्प करना होगा कि मेरी आँखे वही देखेगी, जो मैं देखना चाहता हूँ। मेरे कान वही सुनेंगे जो मैं सुनना चाहता हूँ, मेरे मुंह से वही शब्द निकलेंगे जिनके लिए मुझे कभी आई एम सॉरी नहीं बोलना पड़े।
ये दिव्य और प्रेरक विचार हैं संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के, जो उन्होंने बुधवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल विद्या-सुधा सत्संग मंडप में आयोजित चातुर्मास की महती धर्मसभा में उपस्थित समाज बंधुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। राष्ट्रसंत के प्रवचनों की अमृत वर्षा का लाभ लेने के लिए दलाल बाग में दिनोंदिन भक्तों का मेला जुट रहा है। देशभर से आए साधक यहाँ नियमित रूप से सत्संग सभा का लाभ ले रहे हैं। प्रवचन शुभारम्भ के पूर्व दिगम्बर जैन समवशरण बहू मंडल की टीम ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। दीप प्रज्वलन सुरेश-अतुल जैन और शरद-सुषमा जैन परिवार ने किया। शांतिधारा मुकेश-सुनीता जैन द्वारा की गई। सभी साधकों की अगवानी चक्रवर्ती नवीन-शिवानी गोधा, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद-अंतिका गोधा परिवार द्वारा की गई। संचालन अनुराग जैन ने किया और आभार माना छत्रपति नगर समाज अध्यक्ष भूपेंद्र जैन और महामंत्री विपुल बांझल ने। संयोजक नवीन गोधा, हर्ष जैन, आकाश जैन कोयला एवं आनंद गोधा ने बताया कि रविवार 9 अगस्त को ‘सुधाका सागर’ पुस्तक पर आधारित प्रश्नोत्तरी स्पर्धा का आयोजन होगा जिसमें 8 से 15 वर्ष तक की आयु के बच्चे और 16 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोग भाग ले सकेंगे। विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार भी प्रदान किए जाएँगे। चातुर्मास के दौरान दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी होंगे।
राष्ट्रसंत ने अपने आशीर्वचन में कहा कि मनुष्य का मन चंचल होता है। मन की गति सबसे तेज होती है। सबसे बड़ा काम होता है अपने मन को स्वयं के अनुकूल बनाना, यह हमारा ही काम है। प्रभु की माला फेरते समय मन चंचल होता है लेकिन फिल्म देखते समय नहीं, ऐसा क्यों। हम अब तक मन के पीछे दौड़ते आए हैं लेकिन अब ऐसा करें कि मन हमारे पीछे दौड़े। हम सब अपने जीवन में अच्छा बनना चाहते हैं लेकिन सवाल यह है कि हम अच्छा क्यों नहीं बन सकते। हम लोग (साधु) तो सभी इच्छाओं को समाप्त कर चुके हैं। धर्म जो चाहता है, वह सब हमारे मन में हैं लेकिन हम अच्छे मन को भी बुरा सोचकर बुरा बना लेते हैं।
राष्ट्रसंत सुधासागर म.सा. ने भक्तों से आग्रह किया कि वे धर्म के रास्ते पर चलें। संसार में जो हमारे प्रतिकूल है, उसको मैं तुम्हारे लिए अनुकूल बना दूंगा, इसकी जिम्मेदारी मुझपर छोड़ दो। बस, इतना ही ध्यान रखना कि हमें अपने मन को अपने अनुकूल बनाना है। साधु उसी का नाम है जो अपने भक्तों की किस्मत पलट दे। गुरु किस्मत की लकीरों को बदल देते हैं। भगवान के भक्त में भी बहुत ताकत होती है। बस, उसे यह मानना होगा कि मैं सच्चे देव, सच्चे शास्त्र और सच्चे गुरु का भक्त हूँ। भक्तामर स्त्रोत में कहीं भी भगवान से कुछ नहीं माँगा गया है, केवल स्तुति की गई है। अपना मुंह हमेशा ऐसा ही खोलना कि हम जो शब्द बोल रहे हैं वे हमें वापस नहीं लेना पड़े। यदि मन पर ही काबू नहीं है तो हम श्रेष्ठ कैसे बन पाएँगे। मैं धन का मार्ग नहीं बता सकता लेकिन धर्म का मार्ग बता सकता हूँ। हम सिर्फ धर्म के पीछे दौड़े, धन तो अपनेआप हमारे पीछे दौड़ा चला आएगा। हम जिसके पीछे भागेंगे, वह हमसे आगे-आगे भागेगा। संसार को पीछे छोड़ेंगे तो संसार हमारे पीछे भागेगा। जैन दर्शन कहता है कि तुम धर्म को आगे कर लो, संसार तुम्हारे पीछे-पीछे चलता रहेगा।।
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