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साधु बनने से ज्यादा दिक्कत गुरु बनने में – राष्ट्र संत सुधासागर म.सा.

साधु बनने से ज्यादा दिक्कत गुरु बनने में – राष्ट्र संत सुधासागर म.सा.

दलाल बाग में गुरु पूर्णिमा महोत्सव में जुटा देशभर से आए भक्तों और शिष्यों का मेला-आज मंगल कलश स्थापना

 

इंदौर। आजकल ज्ञानियों की भरमार हो रही है, जिसे देखो वह ज्ञानी बना फिर रहा है। जीवन में उस व्यक्ति से कभी कोई सीख मत लेना, जिसका कोई गुरु न हो। साधु बनने में ज्यादा दिक्कत नहीं है, दिक्कत केवल गुरु बनने में है। भगवान की वाणी में बहुत अर्थ होते हैं। हम समझ नहीं सकते कि भगवान ने क्या बोला है और उसका क्या अर्थ है। ज्ञानी तो रावण भी था लेकिन उसका गुरु कौन था, ये नहीं पता। जीवन में यदि हमें अच्छा गुरु बनाना है तो उसी को बनाना चाहिए जिसका कोई गुरु हो। हमारी जिनवाणी और शास्त्रों में बहुत सारी बातें लिखी हुई हैं, उसका कितना ही ज्ञान प्राप्त कर लेना लेकिन जब तक गुरु नही समझाएँगे, जिनवाणी का काम समझ नहीं बैठेगा। गुरु पूर्णिमा का बहुत बड़ा महत्व है। गुरु के बिना हमारा कोई काम नहीं चल सकता। गुरु ही हमें बताएंगे कि मोक्ष हमसे कितनी दूर है। गुरु सिर्फ दशमलव बनकर हमारे जीवन में आते हैं, उसके बाद सब काम अपनेआप सफल होते चले जाते हैं। प्रवचन की गद्दी पर बैठने की पात्रता उसी को है जो स्वयं किसी गुरु का शिष्य हो।

संत शिरोमणि विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज ने बुधवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल सत्संग सभा मंडप में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव की धर्मसभा में उपस्थित समाज बंधुओं को संबोधित करते हुए उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। महोत्सव में भागीदारी के लिए राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात और प्रदेश के सागर, जबलपुर, बीना, टीकमगढ़ सहित बुन्देलखण्ड से आए करीब ढाई हजार समाज बंधुओं ने हर्षनाद के बीच राष्ट्रसंत के प्रवचनों का लाभ लिया। विशेष बसों से आए इन श्रद्धालुओं के लिए समिति द्वारा आवास एवं भोजन की व्यवस्था दलाल बाग पर की गई है। दलाल बाग पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव के लिए भक्तों और शिष्यों का मेला जुटा हुआ है। प्रारम्भ में धर्म प्रभावना समिति की ओर से मनीष गोधा, हर्ष जैन, नवीन गोधा, अशोक डोसी एवं आकाश कोयला ने साधकों की अगवानी की और गुरु पूर्णिमा तथा कलश स्थापना के कार्यक्रमों का विवरण दिया। इंदौर दिगम्बर जैन समाज की ओर से 50 से अधिक पदाधिकारियों ने राष्ट्रसंत को श्रीफल भेंट किए। दोपहर 1.30 बजे से शाम 5 बजे तक यह महोत्सव चला, जिसमें अनेक विद्वानों ने भी गुरु की महत्ता बताई। संचालन बालब्रह्मचारी प्रदीप भैया ने किया और मांगलिक क्रियाओं को भी सम्पादित किया। चातुर्मास के दौरान दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी होंगे।

राष्ट्रसंत ने कहा कि डॉक्टर की पढ़ाई बहुत कठिन है लेकिन मेडिकल स्टोर चलाने वाला कम पढ़ाई में भी अपना काम चला सकता है, उसे केवल डॉक्टर की राइटिंग समझ में आना चाहिए। डॉक्टर और वकील को सिर्फ पेन और लैटरहेड चाहिए, इनके कमरे में और कुछ नहीं मिलता लेकिन इनका मस्तिष्क ही सबकुछ है। बिना डॉक्टर के कभी कोई दवाई मत लेना। आपको मेडिकल स्टोर वाला भ्रमित कर सकता है। बीमारी का इलाज डॉक्टर ही बता सकता है। हमें अपने गुरु की पहचान भी याद रखना चाहिए कि उसके पास कितने गुणधारी लोग हैं। दिगम्बर मुद्राधारी, 28 मूलगुणधारी ही हमारी परम्परा में गुरु हैं। गुरु सिर्फ 1452 ही बन पाए, उनमें भी मात्र 24 ही बड़े गुरु बने हैं। भगवान सब समझते हैं लेकिन हमें नहीं समझते जबकि गुरु सब समझते हैं और हमें भी समझते हैं।

आज मंगल कलश स्थापना – आयोजन समिति के मनीष गोधा, हर्ष जैन एवं नवीन गोधा ने बताया कि गुरुवार 30 जुलाई को सुबह 7.30 बजे से मंगल कलश स्थापना का मुख्य आयोजन होगा। इस दौरान कलश स्थापना के पात्र सौभाग्यशाली समाज बंधुओं का चयन भी होगा, जिसे लेकर दिनभर उत्सुकता और चर्चाओं का दौर चलता रहा। कलश स्थापना के साथ ही राष्ट्र संत, उनके 18 शिष्य एवं 20 त्यागियों का समूह 4 माह तक यहीं विराजित रहेगा। इस दौरान पर्वाधिराज पर्युषण सहित अनेक धार्मिक आयोजन जारी रहेंगे। विशेष रूप से देश में पहली बार इंदौर में राष्ट्र संत सुधासागर म.सा. के सानिध्य में 10 दिवसीय श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन भी सितम्बर माह में होगा। इन सभी आयोजनों के लिए दलाल बाग में व्यापक तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही है।

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