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सप्तऋषि भागवत मंडल की मेजबानी में आज से खजराना गणेश मंदिर पर अधिकमास में भागवत ज्ञान यज्ञ का दिव्य अनुष्ठान

सप्तऋषि भागवत मंडल की मेजबानी में आज से खजराना गणेश मंदिर पर अधिकमास में भागवत ज्ञान यज्ञ का दिव्य अनुष्ठान

पुरुषोत्तम मास की सर्वप्रथम शोभा यात्रा निकलेगी सुबह 8 बजे खजराना गणेश की साक्षी में

इंदौर। पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में सप्त ऋषि भागवत मंडल के तत्वावधान में 17 से 23 मई तक प्रख्यात भागवताचार्य और दुनिया के अनेक देशों में सनातन संस्कृति का परचम फहरा चुके अन्तर्राष्ट्रीय कथा वाचक आचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी के श्रीमुख से खजराना गणेश मंदिर परिसर के गणेश हॉल में भागवत ज्ञान यज्ञ का दिव्य अनुष्ठान किया जा रहा है। अनुष्ठान का शुभारंभ रविवार 17 मई को सुबह 8 बजे मंदिर परिसर में शोभा यात्रा के साथ होगा जो पुरुषोत्तम मास की सबसे पहली शोभा यात्रा होगी। पहले दिन की कथा सुबह 9 से 11 बजे तक होगी तथा 18 से 23 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3 से 6 बजे तक पं. तिवारी भागवत कथामृत की वर्षा करेंगे।

सप्त ऋषि भागवत मंडल के प्रमुख अशोक-आरती खंडेलवाल, रामचंद्र-उषा पितलिया एवं लक्ष्मण-चंद्रकांता कानूनगो ने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पहले दिन कलश यात्रा के पश्चात गोकर्ण चरित्र एवं भागवत की महिमा का प्रसंग होगा। कथा में प्रत्येक दिन के लिए अलग-अलग मनोरथी मनोनीत किए गए हैं तथा कथा प्रसंगानुसार प्रत्येक दिन के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड तय किया गया है। कथा स्थल पर मौसम को देखते हुए भक्तों की सुविधा के लिए समुचित प्रबंध किए जा रहे हैं। भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी पूर्व में दुबई, सिंगापुर, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल तथा देश के लगभग सभी तीर्थस्थलों पर भागवत कथा एवं सनातन धर्म की पताका फहरा चुके हैं।

मंडल के हितेंद्र-वन्दना ग्रोवर, स्वप्न-स्वाति खंडेलवाल, महेंद्र-दिव्या मानधन्या एवं आशीष-खनक शर्मा के अनुसार पहले दिन पुरुष चुनरी की जैकेट और महिलाएं लाल चुनरी में सज-धजकर आएंगे। दूसरे दिन शिव विवाह प्रसंग में पुरुष एवं महिलाऐं नीले परिधान में आएंगे। मंगलवार 19 मई को वामन अवतार प्रसंग में पुरुष एवं महिलाएं लहरिया एवं पिंक रानी कलर के ड्रेस कोड में शामिल होंगे। बुधवार 20 मई को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में पुरुष एवं महिलाएं पीताम्बर परिधान में सज-धजकर आएंगे। गुरुवार 21 मई को महिला-पुरुष हरे रंग के ड्रेस कोड में आएंगे तथा गोवर्धन पूजा उत्सव में शामिल होंगे। शुक्रवार 22 मई को रुक्मणी विवाह का उत्सव मुख्य मनाया जाएगा जिसमें पुरुष एवं महिलाएं अपनी पसंद के परिधान में सज-धजकर शामिल होंगे। समापन दिवस पर 23 मई को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष एवं कथा विश्राम के प्रसंग में श्रद्धालु लाल रंग के परिधान में सज-धजकर भागीदार बनेंगे। इस तरह सातों दिनों के लिए सात मनोरथी मनोनीत कर प्रत्येक दिन के लिए ड्रेस कोड भी तय किया गया है। कथा 18 मई से प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक होगी। व्यवस्था समिति के संध्या-कैलाश किलकिलिया एवं उषा-विनोद केदावत ने बताया कि कथा स्थल पर भक्तों की सुविधा के लिए बैठक व्यवस्था, शीतल पेय, पंखे-कूलर, सुरक्षा एवं वाहन पार्किंग सहित समुचित प्रबंध किए जा रहे हैं।

 

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