इंदौर(विनोद गोयल)। मध्य प्रदेश के दो महत्वपूर्ण शहर इंदौर और खंडवा लंबे समय से व्यापार, उद्योग, कृषि परिवहन और धार्मिक यात्राओं के लिए एक दूसरे से गहराई से जुड़े रहे हैं। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर और दक्षिणी मध्य प्रदेश के प्रमुख रेलवे व व्यापारिक केंद्र खंडवा के बीच आवागमन का मुख्य आधार रहा इंदौर–खंडवा मार्ग (NH-347BG) अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा भारत सरकार की महत्वाकांक्षी इंदौर–इच्छापुर कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत तेजाजीनगर से बलवाड़ा तक 33.40 किलोमीटर लंबा 4-लेन हाईवे तेजी से आकार ले रहा है। यह परियोजना केवल सड़क चौड़ीकरण नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग, सुरंगों और उन्नत संरचनाओं से सुसज्जित एक नया हाई-स्पीड कॉरिडोर साबित होगी, जो क्षेत्र की कनेक्टिविटी, सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगा।
घाट की खतरनाक राह अब बनेगी सुरक्षित
अब तक यह मार्ग केवल दो लेन का था, जहां बढ़ते ट्रैफिक, भारी वाहनों की आवाजाही और घाट सेक्शन के कारण अक्सर जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बनती थी। मानसून और कोहरे के मौसम में यह रास्ता और भी जोखिम भरा हो जाता था।
इन्हीं चुनौतियों को समाप्त करने के लिए अब यहां आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक ब्लास्टिंग तकनीक से तीन सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है, जो इस परियोजना की सबसे खास विशेषता हैं भेरूघाट टनल – 575 मीटर, बाईग्राम टनल – 480 मीटर, चौरल घाट टनल – 550 मीटर इन टनलों के बनने से घुमावदार और जोखिमपूर्ण घाट मार्ग की जगह सीधा, सुरक्षित और तेज़ आवागमन संभव होगा।
आधुनिक संरचनाओं से सुसज्जित होगा मार्ग
परियोजना को भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक मानकों पर विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं।, 01 मेजर ब्रिज, 01 रेलवे ओवर ब्रिज (ROB), 02 वायाडक्ट, 01 व्हीकल ओवर पास, 04 व्हीकल अंडर पास, 01 लाइट व्हीकल अंडर पास, 06 स्मॉल व्हीकल अंडर पास, 14 माइनर ब्रिज, 03 माइनर ब्रिज कम वायाडक्ट, 22 बॉक्स कल्वर्ट, 11 पाइप कल्वर्ट इन संरचनाओं से स्थानीय यातायात को सुरक्षित क्रॉसिंग सुविधा मिलेगी और मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक निर्बाध रूप से चलता रहेगा।
टनल निर्माण: तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण काम
घाट क्षेत्र में सुरंग बनाना आसान नहीं होता। यहां भू-वैज्ञानिक अनिश्चितताएं, अलग-अलग प्रकार की चट्टानें, भूजल का दबाव और भूमि की अस्थिरता जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई बार अचानक चट्टानों का टूटना (रॉक बर्स्ट) या नई फॉल्ट लाइन सामने आना भी निर्माण कार्य को प्रभावित कर सकता है। इसीलिए परियोजना में उन्नत इंजीनियरिंग तकनीक, मजबूत सपोर्ट सिस्टम और वॉटरप्रूफ संरचनाओं का उपयोग किया जा रहा है, ताकि टनल लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ रह सके।
यात्रा समय घटेगा, दुर्घटनाएं होंगी कम
परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, ईंधन की बचत होगी, ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, भेरूघाट और चौरल घाट जैसे ब्लैक स्पॉट्स पर दुर्घटनाएं कम होंगी यात्रियों को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा।
ओंकारेश्वर और महाराष्ट्र तक बेहतर कनेक्टिविटी
यह मार्ग क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से भी बेहद अहम है। इसके माध्यम से इंदौर से ओंकारेश्वर, खंडवा, बुरहानपुर और महाराष्ट्र के जलगांव की यात्रा अधिक आसान हो जाएगी। इससे कृषि परिवहन, व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
सिंहस्थ 2028 के लिए भी महत्वपूर्ण
यह परियोजना धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी खास मायने रखती है। इंदौर के आसपास देश के दो प्रमुख ज्योतिर्लिंग — उज्जैन का महाकालेश्वर और खंडवा का ओंकारेश्वर स्थित हैं। सिंहस्थ-2028 के दौरान देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन आएंगे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इंदौर के रास्ते ओंकारेश्वर की यात्रा करेंगे। ऐसे में यह नया हाईवे उस समय भारी यातायात को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संभालने में अहम भूमिका निभाएगा।
सुरक्षा और पर्यावरण का भी रखा गया ध्यान
परियोजना में सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, क्रैश बैरियर,रोड सेफ्टी साइनज, वर्षा जल निकासी व्यवस्था, हरित पट्टी और वृक्षारोपण जैसे उपाय किए जा रहे हैं, ताकि एक सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल राष्ट्रीय राजमार्ग विकसित किया जा सके। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण आधुनिक, सुरक्षित और तेज़ सड़क अवसंरचना के माध्यम से “सुरक्षित यात्रा – समृद्ध भारत” के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।


