इंदौर(विनोद गोयल)। श्रद्धा और विश्वास—ये दो ऐसे आधार हैं, जिन पर हर सफल गृहस्थ जीवन टिका होता है। यदि इन दोनों में संतुलन न रहे, तो जीवन की गाड़ी डगमगा सकती है। भगवान शिव करुणा के साकार स्वरूप हैं और करुणा का अर्थ है समस्त जीवों के प्रति सद्भाव रखना। केवल भगवान की पूजा करना और जीव मात्र से बैर रखना, ऐसी भक्ति से भगवान शिव कभी प्रसन्न नहीं होते।
जीवन को सही दिशा देती है शिवपुराण
ये प्रेरक विचार प्रख्यात आचार्य पं. विष्णुदत्त शर्मा महर्षि ने बुधवार को श्रीनगर मेन स्थित गार्डन में खत्री महिला मंच एवं खत्री सभा इंदौर के तत्वावधान में चल रही महाशिवपुराण कथा के तीसरे दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिव पुराण कथा केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि पापों से मुक्ति और जीवन को सही दिशा देने वाली ज्ञानगंगा है। शिव श्रद्धा के प्रतीक हैं और माता पार्वती विश्वास का स्वरूप—इन दोनों के समन्वय से ही आदर्श गृहस्थ जीवन की स्थापना होती है।
शिव विवाह का दिव्य उत्सव
कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग जब आया तो पूरा पांडाल भक्ति और उत्साह से सराबोर हो उठा। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच भगवान शिव की भव्य बारात निकाली गई। नंदी बैल और सजे-धजे रथ में विराजित भगवान शिव की झांकी ने वातावरण को पूरी तरह शिवमय बना दिया। वर-वधू पक्ष की ओर से बारातियों का स्वागत किया गया और श्रद्धालुओं ने इस दिव्य उत्सव का आनंद लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंगलाचरण के साथ व्यासपीठ की पूजा-अर्चना से हुई। खत्री सभा के अध्यक्ष प्रदीप बिरदी, प्रबोध आहूजा, निर्मल महरा, श्याम मेहता तथा महिला मंच की ओर से रीता टंडन, उर्वशी बिरदी, ममता सेठ, साधना कपूर, इंदु टंडन, वंदना मेहता, रेणु टंडन, पूनम चोपड़ा और मोहिनी भयाना सहित कई सदस्यों ने पूजा कर कथा का शुभारंभ किया।
बिल्वपत्र अर्पित करने से मिलते है आध्यात्मिक लाभ
कथा के दौरान आचार्य महर्षि ने भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बिल्वपत्र की उत्पत्ति और उसके महत्व का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि शिव पूजा में बिल्वपत्र अर्पित करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। साथ ही पार्थिव शिवलिंग पूजन की विधि बताते हुए कहा कि इसका निर्माण मंत्र-जप करते हुए करना चाहिए और उसकी ऊंचाई लगभग चार अंगुल होनी चाहिए। भक्ति रस से सराबोर इस कथा में मधुर भजनों की प्रस्तुति ने वातावरण को और भी आनंदमय बना दिया। भजनों की धुन पर श्रद्धालु झूमते और थिरकते नजर आए।
जप का महत्व बताया
महिला मंच की प्रमुख रीता टंडन और ममता सेठ ने बताया कि आचार्य पं. विष्णुदत्त शर्मा महर्षि प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक संगीतमय शैली में शिव महापुराण कथा का वाचन कर रहे हैं। आगामी दिनों में कार्तिकेय जन्म प्रसंग, तुलसी-जालंधर कथा, शिवरात्रि व्रत कथा, जप का महत्व और शिव-आराधना से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंगों की व्याख्या की जाएगी।
मनुष्य का विवेक भी जागृत होता
आचार्य महर्षि ने कहा कि सत्संग और शिव पुराण कथा से न केवल पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मनुष्य का विवेक भी जागृत होता है। जब तक हमारी बुद्धि निर्मल और पवित्र नहीं होती, तब तक हम रजोगुण और तमोगुण के प्रभाव में रहते हैं। उन्होंने कहा कि जीव मात्र के प्रति दया और सद्भाव ही मनुष्य जीवन की सच्ची पहचान है।
उन्होंने अंत में कहा कि दुर्लभ मनुष्य जीवन की सार्थकता तभी है, जब हम अपने कर्मों के साथ-साथ अपने विचारों में भी पीड़ित मानवता की सेवा का भाव रखें। यही भाव हमें सच्चे अर्थों में शिव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।


