विश्व की एकमात्र नदी है मां नर्मदा जिसकी परिक्रमा की जाती है। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि जब नदीं उल्टी दिशा में बहती है तो उल्टी दिशा में बहने वाली मां नर्मदा का परिक्रमा ही क्यो कि जाती है। जब मां नर्मदा का महत्व की बात आती है तो शास्त्रो में कई ऐसे तथ्य मिलते है जो मां नर्मदा की महत्ता को बताते है। मान्यता है कि नर्मदा जी को दाहिनी ओर रखते हुए उनकी परिक्रमा की शुरूआत की जाती है और जो भी व्यक्ति मां नर्मदा की परिक्रमा कर लेता है उसके पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मोक्षदायी है मां नर्मदा
नर्मदा नदी दुनिया की इकलौती ऐसी नदी है जिसकी परिक्रमा की जाती है. कहा जाता है कि “आध्यात्मिक तरीके से देखा जाए तो जो नर्मदा की परिक्रमा करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह भी कहा गया है कि 21 वर्ष तक जो नर्मदा नदी का जल पीकर नर्मदा जी के सानिध्य में रहकर उनकी पूरी परिक्रमा करता है, उन्हें शिव की प्राप्ति होती है। इस वर्ष नर्मदा परिक्रमा पर राजस्थान सुरजकुंड धाम के संत श्री अवधेश चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज निकल पड़े है। जिनकी नर्मदा यात्रा करने की कई वर्षों से प्रतिज्ञा थी। इस वर्ष इन्होने नर्मदा के किनारे ही चातुमार्स किया। इसके बाद ओंकारेश्वर से ही अपनी नर्मदा परिक्रमा शुरू की है। गुरूदेव सतत पैदल चल रहे है। इसके साथ ही संतश्री नंगे पांव मां नर्मदा का परिक्रमा कर रहे है। संतश्री विगत 25 वर्षों से घने जंगल में तपस्या में लीन रहे है। इसके बाद मां नर्मदा की परिक्रमा करने का अदभूत संकल्प लेकर संसार को मां नर्मदा की तरह ही संदेश दे रहे है कि मां का सानिध्य कितना आवश्यक है। मां नर्मदा के महत्व का क्या ही वर्णन करे जिसके तट पर कई सिद्ध साधु संत भी निरंतर तपस्या करते है।
संसार से विपरित चलने का संदेश
मां नर्मदा का विपरीत दिशा में बहने के कारण ही संसार को त्यागने वाले मां नर्मदा की परिक्रमा करते है। धर्म से जुड़े लोग बताते है कि “नर्मदा नदी एकदम से विपरीत पश्चिम दिशा की ओर बहती हैं, जो उन्हें दूसरी नदियों से अलग बनाती हैं. इसके प्राकृतिक कारण तो कई हो सकते हैं लेकिन अगर आध्यात्मिक कारण की बात करें, तो जिस तरह से संसार की आध्यात्मिक यात्रा चालू होती है तो हमें संसार से उलटी दिशा में बहना पड़ता है. संसार की दृष्टि से हम सांसारिक कर्मों को कर रहे हैं यह सीधी दिशा है, लेकिन आध्यात्मिक कर्मों को करने के लिए हमको उल्टी यात्रा करनी पड़ती है। यहीं संदेश मां नर्मदा हमें उल्टी दिशा में बहते हुए देती है कि तपस्य़ा का मार्ग संसारिक जीवन के मार्ग से उल्टा है। आध्यात्मिक तरीके से देखें तो नर्मदा नदी उल्टी नहीं बल्कि सीधी ही बहती हैं।
जिंदगी बदल देती है मां नर्मदा
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि ”नर्मदा परिक्रमा का काफी धार्मिक महत्व है. इसमें लोगों की बड़ी आस्था रहती है और कई तीर्थ यात्राओं में जितना पुण्य मिलता है उससे कहीं ज्यादा पुण्य नर्मदा परिक्रमा में मिलता है. पुराणों में इसका वर्णन भी मिलता है और उसमें ऐसा कहा गया है कि एक बार नर्मदा यात्रा कर लेने से जिंदगी बदल जाती है. व्यक्ति के पापों का नाश हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. हालांकि नर्मदा परिक्रमा को काफी कठिन माना जाता है. कहा ये भी जाता है कि नर्मदा परिक्रमा कर लेने से व्यक्ति को जीवन के कई सारे ज्ञान एक साथ हो प्राप्त हो जाते है।
कब से कब तक परिक्रमा का नियम
“नर्मदा परिक्रमा वैसे तो कभी भी कर सकते हैं लेकिन देवउठनी एकादशी से नर्मदा परिक्रमा शुरू करना चाहिए. यात्रा के दौरान संत और भक्त नर्मदा किनारे चातुर्मास भी करते हैं. मतलब वहीं रुक जाते हैं.”
चातुर्मास में नहीं होती परिक्रमा
नर्मदा परिक्रमा के दौरान चातुर्मास में परिक्रमा नहीं की जाती है. ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास में नर्मदा नदी में स्नान करना वर्जित होता है. शास्त्रों में उल्लेख है कि चातुर्मास के दौरान नर्मदा नदी में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है और पाप भी नष्ट नहीं होते हैं.
पैदल परिक्रमा में कितना समय लगता है
यदि नर्मदा जी की पैदल परिक्रमा की बात करें तो यह आपके प्रतिदिन पैदल चलने के ऊपर निर्भर करता है कि आप एक दिन में कितने किलोमीटर पैदल चलते हैं. आज के समय में लोग पैदल चलकर लगभग 108 दिन तो कई लोग लगभग 90 दिन में भी पैदल परिक्रमा को पूरी कर लेते हैं. यदि साधु संतों की परिक्रमा की बात करें तो पहले साधु संत 3 साल 3 महीना और 13 दिन में परिक्रमा पूरी करते थे.इसमें चातुर्मास भी करना पड़ता है.
ओंकारेश्वर महादेव में पूरी होती है परिक्रमा
जो भी भक्त नर्मदा परिक्रमा करना चाहता है और जब नर्मदा परिक्रमा की शुरूआत करता है तो उसे संकल्प के तौर पर जल लेकर चलना पड़ता है. जो संकल्प वाला जल होता है, परिक्रमा पूर्ण करने के बाद ओंकारेश्वर महादेव में जल को अर्पित करना पड़ता है. उसके बाद ही परिक्रमा पूर्ण मानी जाती है।


