इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई 32 मौतों का मामला सोमवार को राज्यसभा में गूंजा। राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज पानी सबसे गंभीर समस्या बन चुका है। आज जनता को जहरीला पानी सप्लाई किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल आपूर्ति विभाग में भारी भ्रष्टाचार है और इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
मानवता से जुड़ा है प्रश्न
राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन की उपस्थिति में प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह विषय केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता से जुड़ा हुआ प्रश्न है। उन्होंने पूछा कि गुजरात के गांधीनगर में दूषित पानी पीने से कितने लोग बीमार हुए और इंदौर में अब तक कितनी मौतें हो चुकी हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से हस्तक्षेप कर जिम्मेदारी लेने की मांग की।
भूजल की गुणवत्ता पर सरकार ने क्या कदम उठाए?
प्रमोद तिवारी ने यह भी सवाल उठाया कि भूजल की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार की ठोस कार्ययोजना क्या है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इंदौर का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि इन मौतों की जिम्मेदारी किसकी तय की गई है। क्या केवल राज्य सरकार जिम्मेदार है या जल शक्ति मंत्रालय ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से कोई रिपोर्ट तलब की है या नहीं। इससे पहले कांग्रेस सांसद डा. सैयद नासिर हुसैन ने भी राज्यसभा में इंदौर की सफाई व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए चिंता जताई थी।
सरकार जल प्रदूषण की घटना से अवगत है
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि केंद्र सरकार इंदौर के भागीरथ पुरा में हुई जल प्रदूषण की घटना से अवगत है। साथ ही, सरकार अमृत और अमृत 2.0 जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्यों को सहायता प्रदान कर रही है।
आधुनिक वितरण प्रणाली पर हो रहा काम
मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रभावित क्षेत्र में पाइपलाइनें 1997 जितनी पुरानी हैं। नगर निगम ने जल आपूर्ति के लिए चार पैकेज निविदाएं जारी की हैं। पैकेज-1 का कार्य शुरू हो चुका है। इस परियोजना में जल स्रोत विकास से लेकर आधुनिक वितरण प्रणाली और दीर्घकालिक रखरखाव शामिल है।


