समाज को एक बार फिर कृष्ण जैसे अवतार की जरूरत। – आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती
गीता भवन में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में आए अनेक संत विद्वान, धूमधाम से मना राम एवं कृष्ण जन्मोत्सव
इंदौर। भगवान का अवतार अधर्म और अन्याय का नाश करने के लिए ही होता है। अवतार अर्थात निराकार का साकार होना। भगवान के लिए सभी बराबर है। जीव मात्र पर समानरूप से कृपा करना प्रभु का स्वाभाव है, फिर भी भागवत आश्रय लेने वाले जीव पर भगवान की विशेष कृपा होती है। कंस अत्याचारी असुर था, उनके शासन में प्रजा दुःखी थी और दया, शांति, क्षमा जैसे दिव्य गुण नष्ट हो गए थे। हिंसा, चोरी, बलात्कार और स्वार्थ बढ़ गया था। कंस जैसे अत्याचारों का मुकाबला करने के लिए समाज को एक बार फिर कृष्ण जैसे अवतार की जरूरत है।
ये प्रेरक विचार हैं वृन्दावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती के, जो उन्होंने गीता भवन में भक्त मंडल एवं अखंड प्रणव योग वेदांत पारमार्थिक न्यास के तत्वावधान में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में राम एवं कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंगों की व्याख्या के दौरान व्यक्त किए। कथा में भगवान के जन्मोत्सव का जीवंत उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। जैसे ही भगवान के जन्म का प्रसंग आया, समूचा सभागृह भगवान के जयघोष से गूंज उठा। प्रारम्भ में भक्त मंडल की ओर से श्रीमती रश्मि रामनानी, सुरेश शाहरा, राम ऐरन, प्रेमचंद गोयल, मनोज गुप्ता, गोकुल सिसोदिया, कशिश सतवानी आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी श्रीमती कांता अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, अनिल खंडेलवाल, संतोष पाराशर, राकेश मंडन, चन्दन मंगलानी, गोविन्द सिंह बैस आदि ने की। कथा में वृन्दावन से स्वामी विशुद्धानंद, स्वामी ज्ञानेश्वर, स्वामी पूर्णानंद, स्वामी पुर्नेश्वरान्द, शिव चैतन्य, स्वामी कृष्णानंद सहित अनेक संत विद्वान भी पधारे। सोमवार 20 जुलाई को गोवर्धन पूजा प्रसंग मनाया जाएगा। गीता भवन में ज्ञान यज्ञ का यह आयोजन 23 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 6.30 बजे तक जारी रहेगा। गुरु पूर्णिमा महोत्सव 29 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक झलारिया स्थित स्वामी श्रीअखंड वेदांत आश्रम पर मनाया जाएगा।
स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने कहा कि कंस ने देवकी के 6 बच्चे मार दिए। वह लोगों पर अत्याचार करता रहा। उस समय कंस के विरोध में अत्याचार का प्रतिरोध होना चाहिए था। लेकिन उस समय के लोगों ने कंस के अत्याचार का विरोध नही किया। वे आठवे की प्रतीक्षा कर रहे थे कि आठवां आएगा और हमारी सुरक्षा करेगा। अन्याय का विरोध करना चाहिए। शासन तंत्र में न्याय प्रिय, कर्तव्य परायण, शीघ्र कार्य करने वाले अच्छे लोग होना चाहिए। शासन में अच्छे लोगों के अभाव में दुर्व्यवस्था फैल जाती है। मानवीय कार्य बंद हो जाते हैं। आज समाज को एक बार फिर कृष्ण जैसे अवतार की जरूरत है। समाज को भी संगठित होकर असुरी और राक्षसी प्रवृत्तियों का मुकाबला करना होगा।
भक्त मंडल की ओर से श्रीमती मृदुला शाहरा एवं श्रीमती कांता अग्रवाल ने बताया कि कथा में मंगलवार 21 जुलाई को रुक्मणी विवाह एवं सुदामा चरित्र तथा 22 जुलाई को परीक्षित मोक्ष सहित विभिन्न प्रसंगों की कथा के बाद 23 जुलाई को सुबह हवन-पूजन के साथ समापन होगा। कथा के दौरान प्रसंगानुसार विभिन्न उत्सव भी मनाए जाएँगे।


