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श्रद्धा के समंदर में उमड़ी आस्था की हिलोरें, इस्कॉन की रथ यात्रा ने अन्नपूर्णा से गोपाल मंदिर तक पूरे मार्ग को बनाया जगन्नाथमय–65 मंचों से हुई पुष्पवर्षा

श्रद्धा के समंदर में उमड़ी आस्था की हिलोरें, इस्कॉन की रथ यात्रा ने अन्नपूर्णा से गोपाल मंदिर तक पूरे मार्ग को बनाया जगन्नाथमय–65 मंचों से हुई पुष्पवर्षा

देश-विदेश के भक्तों और संतों ने हाथों से खींचा भगवान का रथ, हरे रामा-हरे कृष्णा संकीर्तन पर नाचते, गाते और झूमते रहे श्रद्धालु, ड्रोन से हुई पुष्प वर्षा

इंदौर। शहर के प्रमुख आस्था केन्द्र अन्नपूर्णा मंदिर से रविवार दोपहर में निकली इस्कॉन की जगन्नाथ रथयात्रा ने रिमझिम फुहारों के बीच राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर तक करीब 5 कि.मी. लंबे यात्रा मार्ग को हरे रामा हरे कृष्णा संकीर्तन की मस्ती और भक्ति की रसधारा से सराबोर बनाए रखा। इस्कॉन मंदिर इंदौर के अध्यक्ष स्वामी महामनदास, अन्नपूर्णा आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि, स्वामी जयेन्द्रानंद गिरि, अखंडधाम के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप, हंसदास मठ के महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज सहित अनेक संतों-महंतों के सानिध्य में वरिष्ठ समाजसेवी टीकमचंद गर्ग, विष्णु बिंदल, राजेश गर्ग केटी, पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे, पार्षद नंदकिशोर पहाड़िया सहित एक विशाल रथ पर विराजित भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के विग्रह को लेकर यह रथ यात्रा जैसे-जैसे आगे बढती गई, श्रद्धा का समंदर और आस्था के हिलोरे भी बढ़ती चली गई। करीब 12 हजार श्रद्धालुओं का यह काफिला गोपाल मंदिर तक पहुँचने में करीब 5 घंटे का समय लगा। इस दौरान समूचे यात्रा मार्ग पर “जगन्नाथ चका नैन“, “तू न संभाले तो हमें कौन संभाले” और “हरे रामा हरे कृष्णा” संकीर्तन की गूंज बनी रही। भगवान के जयघोष से समूचा मार्ग गुंजायमान होता रहा। यात्रा मार्ग पर ड्रोन से पुष्प वर्षा भी होती रही।

शहर के अनेक धार्मिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, राजनेता एवं विद्वान भी इस यात्रा में भागीदार बने। रथ यात्रा संयोजक हरि अग्रवाल, किशोर गोयल, अशोक गोयल एवं सह संयोजक भावेश दवे ने प्रारम्भ में सभी अतिथियों की अगवानी की। अन्नपूर्णा मंदिर पर दोपहर 12 बजे से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। अतिथियों ने रथ का पूजन और यात्रा मार्ग को झाडुओं से बुहारकर इस यात्रा का शुभारम्भ किया। यात्रा शुरू होते ही भक्तों का जोश पूरे शबाब पर पहुँच गया और नाचते-गाते-झूमते भक्तों के समूह सड़कों पर उतर आए। दुर्गावाहिनी की 12 अश्वारोही बालिकाएं, 2 बैंड, 2 रथ, 6 बग्घियों, 3 भजन मंडलियों, 2 विंटेज गाड़ियों तथा 20 अन्य वाहनों के काफिले सहित इस यात्रा का समूचे मार्ग में 65 स्वागत मंचों एवं तोरण द्वारों से पुष्प वर्षा कर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा एवं भाई बलभद्र के विग्रह के पूजन का सिलसिला पूरे समय चलता रहा। कतर से आए संत डॉ. लक्ष्मणदास, यूक्रेन से आए गोपालाराज दास एवं गोविंदा हरिदास सहित वृन्दावन, मायापुर-कोलकाता एवं देश के अन्य शहरों से आए संतों एवं भक्तों ने अपने संकीर्तन और नृत्य से ऐसा समां बाँधा कि राह चलते लोग भी यात्रा में शामिल होते चले गए और यह काफिला करीब एक किमी लम्बा बन गया। यात्रा का एक सिरा महू नाका चौराहे पर था तो दूसरा नरेन्द्र तिवारी मार्ग के कोने पर। रथयात्रा में शहर के 12 हजार से अधिक सभी वर्गों और धर्मों के श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यात्रा के अंत में चल रहे वाहन से प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी पूरे समय चलती रही। इस दौरान रथ को अपने हाथों से खींचने के लिए भक्तों में होड़ लगी रही। राधा कृष्ण संग गोपियों के नृत्य तथा राधा कृष्ण के स्वरुप में सजी-धजी महिलाएं भी आकर्षण का केंद्र बने रहे।

अनेक समाजों और संस्थाओं द्वारा स्वागत – अग्रवाल, जैन, माहेश्वरी, खंडेलवाल, फतेहपुरिया, नारनोली अग्रवाल पंचायत, श्रद्धा सुमन सेवा समिति, गुर्जर गौड़ समाज, साईं समिति, यादव अहीर समाज, अभा अग्रवाल महासभा, महाकाल सेवा समिति, अहिल्या ओजस्वी संस्था, अन्नपूर्णा क्षेत्र अग्रवाल संगठन, विजयनगर अग्रवाल महासंघ, संस्था संघमित्र, शिव शक्ति मंडल, चमेलीदेवी योग केन्द्र, रणजीत हनुमान भक्त मंडल, शाकम्भरी भक्त मंडल, विश्व हिन्दू परिषद, मल्हारगंज व्यापारी एसो., मोरसली गली व्यापारी संगठन, खजूरी बाजार व्यापारी एसोसिएशन सहित अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों ने विभिन्न मंचों से कहीं पुष्प वर्षा, कहीं फल एवं कहीं फलाहार वितरण कर भक्तों का स्वागत किया।

पूरे मार्ग में प्रसाद वितरण – अन्नपूर्णा मंदिर से आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वैश्वरानंद गिरी के सानिध्य में प्रारम्भ हुई रथ यात्रा नरेन्द्र तिवारी मार्ग, रणजीत हनुमान मंदिर, महू नाका चौराहा, छत्रीपुरा, बियाबानी, मालगंज चौराहा से मल्हारगंज, टोरी कार्नर, गोराकुंड, खजूरी बाजार, राजबाड़ा होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची, जहाँ आम लोगों के दर्शनार्थ रथ को रखा गया।

21 भक्तों ने संभाली यातायात व्यवस्था – प्रमुख रथ में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा के बिग्रह विराजित किए गए थे। इस रथ की ऊँचाई 51 फीट थी जिसे हाईड्रोलिक की मदद से ऊपर-नीचे खिसकाकर बिजली के तारों एवं अन्य अवरोधों से बचाया जाता रहा। यात्रा के अंत में पूरे मार्ग की सफाई के लिए एक अतिरिक्त सफाई वाहन भी साथ चल रहा था वहीं यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भी इस्कॉन के 21 भक्तों की टीम तैनात रही।

विंटेज कारों में भी सवार रहे संत – इस्कॉन से जुड़े अनेक देशी-विदेशी संत एवं अन्य श्रद्धालु इस यात्रा में विंटेज कार में सवार होकर शामिल हुए और भक्तों का उत्साहवर्धन करने के लिए जगह-जगह अपने वाद्य यंत्रों सहित कार से उतरकर नृत्य एवं संकीर्तन की प्रस्तुतियां देते रहे।

संतों ने भी संभाली विभिन्न व्यवस्थाएं – इस्कॉन इंदौर के प्रमुख स्वामी महामनदास के निर्देशन में वृन्दावन के सर्वसाक्षी प्रभु सहित इंदौर इस्कॉन के श्रीनिकेतन दास, अद्विधरण दास, गिरधर गोपाल दास, विशाल प्रभु, अच्युत गोपाल दास, रणधीर दास, कृष्णा देवी दासी सहित अनेक संतों ने भी विभिन्न व्यवस्थाएं संभाली। भगवान के रथ को संतों द्वारा श्रृंगारित करने का काम शनिवार सुबह से प्रारम्भ हो गया जो रविवार सुबह तक चलता रहा। यात्रा का समापन राजवाडा स्थित गोपाल मंदिर पर हुआ जहाँ स्वामी महामनदास एवं अन्य संतों ने भगवान जगन्नाथ की महिमा बताई। इस अवसर पर हजारों भक्तों ने प्रसादी का पुण्य लाभ भी उठाया।

 

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