भौतिकवाद की चकाचौंध में फंसकर हम आधुनिकता के सम्मोहन में खोकर सनातन संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।
श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव
राम और कृष्ण के बिना भारत भूमि की कल्पना भी संभव नहीं
गीता भवन में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद के श्रीमुख से भागवत कथा में मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव –आज गोवर्धन पूजा।
इंदौर। राम नाम की भक्ति का बीज समूचे ब्रह्माण्ड को लहलहा देता है, तो हमारे कृष्ण की भक्ति का माधुर्य भी समूचे विश्व को आज तक प्रेम एवं रस के बंधन में बांधे हुए है। राम भारत भूमि के रोम-रोम में व्याप्त है, तो कृष्ण भी कण-कण में मिल जाएँगे। राम और कृष्ण के बिना भारत भूमि की कल्पना भी संभव नहीं है। इतिहास संग्रह करने वालों को नहीं, त्याग करने वालों को याद रखता है। भौतिकवाद की चकाचौंध में फंसकर हम आधुनिकता के सम्मोहन में खोकर सनातन संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। हमारे भागवत जैसे धर्म ग्रन्थ ही हमें सही दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं।

ये दिव्य विचार हैं श्रीधाम वृंदावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद के, जो उन्होंने बुधवार को गीता भवन सत्संग सभागृह में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में मातुश्री श्रीमती कमलादेवी-बाबूलाल मंगल की पुण्य स्मृति में चल रहे श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर राम एवं कृष्ण जन्म प्रसंग के दौरान व्यक्त किए। कथा शुभारंभ के पहले व्यासपीठ का पूजन प्रमुख संयोजक संजय-किरण मंगल, बिनोद-सुनीता अग्रवाल, समाजसेवी प्रेमचंद गोयल, सुभाष बजरंग, राधेश्याम गुरूजी, कैलाशनारायण बंसल, नारायण अग्रवाल 420 पापड़वाले, राजेश चौधरी, अनिल चौधरी, पुरुषोत्तम अग्रवाल, श्याम मोमबत्ती, दीपचंद अग्रवाल आदि ने किया।

संध्या को वीर बगीची के महामंडलेश्वेर श्री पवनानंद जी महाराज ने व्यास पीठ का पूजन किया। वहीं श्रीधाम वृंदावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने साल श्री फल व दुपट्टे से श्री पवनानंद जी महाराज का व्यास पीठ से अभिनन्दन किया।
विद्वान वक्ता की अगवानी अवनि-अनंत अग्रवाल, गोविन्द मंगल, गोपाल मंगल, विनीता-अक्षत अग्रवाल, चंचल अग्रवाल आदि ने की।
कृष्ण जन्मोत्सव की धूम – कथा में आज भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। पहले राम और फिर कृष्ण जन्मोत्सव की धूम मची रही। कथा प्रसंगानुसार जैसे ही बाबा नंद नन्हे कृष्ण को पुष्पों से सज्जित टोकरी में लेकर कथा स्थल पहुंचे समूचा सभागृह भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष और “नंद में आनंद भयो” भजन पर नाच उठा। साध्वी कृष्णानंद द्वारा प्रस्तुत मधुर भजन भी भक्तों को आल्हादित बनाए हुए है। पुष्प वर्षा के बीच कृष्ण जन्म,पर माखन मिश्री की मटकियाँ फोड़ी गईं। गुब्बारों से कथा स्थल को सजाया गया और बच्चों के बीफ टॉफ़ी-बिस्किट, माखन-मिश्री और पंजेरी का प्रसाद बांटा गया। संयोजक संजय मंगल ने बताया कि कथा 30 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 7 बजे तक होगी। कथा के दौरान विभिन्न उत्सव भी मनाए जाएँगे। गुरुवार को भगवान की बाल लीला, 56 भोग एवं गोवर्धन पूजा प्रसंग मनाया जाएगा।
महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की सुंदर व्याख्या करते हुए कहा कि आज हम भौतिकवाद की चकाचौंध में फंसकर अपने अंतर्मन की शांति को खो रहे हैं। 50 वर्ष पहले डिप्रेशन नाम की कोई चीज नहीं थी लेकिन आज तो 10 साल का बच्चा भी डिप्रेशन का शिकार हो रहा है। हमने प्रकृति को विनाश की ओर मोड दिया है। परमाणु बम जैसी शक्ति बनाकर हमने दुनिया को विनाश के मुहाने पर ला खड़ा किया है। विज्ञान के माध्यम से हमने अनेक सुख-सुविधाएँ प्राप्त कर ली हैं और हम चंद्रमा से लेकर अन्तरिक्ष तक पहुँच गए हैं लेकिन अंतर्मन को जो शांति चाहिए वह इस कथित विकास की आड़ में खो गई है। आज हमें विज्ञान और अध्यात्म के बीच समन्वय कायम करना होगा। भागवत जैसे भारत भूमि के धर्म ग्रंथों में इन सभी संशयों का समाधान मौजूद है।
आज बाल लीला एवं गोवर्धन पूजा – प्रमुख संयोजक संजय मंगल ने बताया कि कथा में पांचवे दिवस 28 मई को बाल लीला, गोवर्धन पूजा एवं 56 भोग, 29 मई को रुक्मणी विवाह एवं शनिवार 30 मई को समापन दिवस पर सुदामा चरित्र के पश्चात फूलों की होली खेली जाएगी।


