गीता भवन में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में आए अनेक संत विद्वान, धूमधाम से मना राम एवं कृष्ण जन्मोत्सव
इंदौर। जो लोग धन-संपत्ति के दम पर प्रभु को पाना चाहते हैं, उन्हें नहीं पता कि भगवान बिकने वाले नहीं हैं। संसार मौत का कुंआ है, जबकि भागवत मोक्ष का महासागर। भगवान को ऐसे लोग पसंद नहीं हैं जो पाखंड और प्रदर्शन में लिप्त रहते हैं। अग्नि के पास जाने पर जल जाएंगे, पानी के पास डूब जाएंगे, आंधी के पास उड़ जाएंगे लेकिन भगवान के पास जाएंगे तो भवसागर से पार लग जाएंगे। हम संसार के लोग अपने रिश्तों में स्वार्थ और कपट रखते हैं लेकिन भगवान का अपने भक्तों के साथ रिश्ता शुद्ध, प्रेम और माधुर्य का होता है। भगवान जो भी करते हैं, भक्तों के लिए ही करते हैं स्वयं के लिए कुछ नहीं।
ये प्रेरक विचार हैं वृन्दावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती के, जो उन्होंने गीता भवन में भक्त मंडल एवं अखंड प्रणव योग वेदांत पारमार्थिक न्यास के तत्वावधान में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में गोवर्धन पूजन प्रसंग की व्याख्या के दौरान व्यक्त किए। कथा में गोवर्धन लीला का जीवंत उत्सव भी बाल ग्वालों के संग धूमधाम से मनाया गया। प्रारम्भ में भक्त मंडल की ओर से प्रेमचंद गोयल, श्रीमती लीला-राजेश अग्रवाल, बंसतीलाल गोयल, श्रीमती माधुरी, श्रीमती मृदुला शाहरा, कमल राठी, मनोज गुप्ता, गोकुल सिसोदिया, कशिश सतवानी आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी योगेन्द्र भाटिया, आनंद चौकसे, मनोज रामनानी, राकेश मंडन, गोविन्द सिंह बैस, अनिल खंडेलवाल आदि ने की। कथा में वृन्दावन से स्वामी भारतानंद सरस्वती, पूर्णानंद सरस्वती, ब्रह्मानंद सरस्वती एवं ब्रजेशानंद सरस्वती, स्वामी ज्ञानेश्वर, शिव चैतन्य, स्वामी कृष्णानंद सहित अनेक संत विद्वानों ने भी विद्वान वक्ता का स्वागत किया। मंगलवार 21 जुलाई को रुक्मणी विवाह एवं सुदामा चरित्र प्रसंग होंगे। गीता भवन में ज्ञान यज्ञ का यह आयोजन 23 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 6.30 बजे तक जारी रहेगा। गुरु पूर्णिमा महोत्सव 29 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक झलारिया स्थित स्वामी श्रीअखंड वेदांत आश्रम पर मनाया जाएगा।
स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने कहा कि भगवान की सभी लीलाएं प्रेम, करूणा और दया से भरपूर है। अपनी लीलाओं से वे मनुष्य के काम, क्रोध और लोभ की प्रवृत्ति का नाश करते हैं। वर्तमान युग में भी वैचारिक प्रदूषण बढ़ रहा है। समाज में नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है। भगवान कृष्ण ने अपनी लीलाओं से मनुष्य के जीवन में माधुर्य और प्रेम का संचार किया है। आज पूरे विश्व को इसी प्रेम और माधुर्य भाव की जरूरत है।
भक्त मंडल की ओर से श्रीमती मृदुला शाहरा एवं श्रीमती कांता अग्रवाल ने बताया कि कथा में बुधवार 22 जुलाई को परीक्षित मोक्ष सहित विभिन्न प्रसंगों की कथा के बाद 23 जुलाई को सुबह हवन-पूजन के साथ समापन होगा। कथा के दौरान प्रसंगानुसार विभिन्न उत्सव भी मनाए जाएँ
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