*अहिल्या उत्सव 2026 वक्तृत्व प्रतियोगिता संपन्न*
-कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विवेक पूर्ण प्रयोग विनाश से बचाएगा
-मानव की नैसर्गिक बुद्धि के विकास के लिए एआई आवश्यक नहीं
इंदौर। मानव के पास नैसर्गिक बुद्धि का बल है इस बुद्धि के बल पर उसने मशीनों का आविष्कार किया और आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता पूर्ण मशीनों के निर्माण में भी उसी के नैसर्गिक दिमाग का उपयोग है हालांकि इसमें मानव जीवन को आसान बनाया है सुविधा पूर्ण बनाया है कोई भी मानव सेवक पूर्णतः 24 घंटे काम नहीं कर सकता यह 24 घंटे उपलब्ध है। इस वैज्ञानिक आविष्कार से मनुष्य की निजता का हनन हो रहा है विचारों में मतभेद आ रहे हैं और विकसित विकासशील देश और गरीब देश की खाई और बढ़ती चली जा रही है ऐसा माना जाता है कि आने वाले कुछ वर्षों में 9 करोड़ नौकरियां पर इसका असर होने वाला है ।उपरोक्त विचार आज अहिल्या उत्सव समिति द्वारा आयोजित वक्तृत्व व स्पर्धा के अंतर्गत विभिन्न स्कूलों से आए शिक्षकों के द्वारा व्यक्त किए गए जिसका विषय था “वर्तमान युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का महत्व एवं चुनौतियां”
*21वीं सदी की चुनौतियांऔर प्रगति का द्वारआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है*
डीप फेक वीडियो डाटा चोरी एआई का गलत इस्तेमाल इसमें नैतिकता का ना होना संवेदना का ना होना करुणा का ना होना मानव को यह धोखा देने के लिए पर्याप्त होता है यह 21वीं सदी की चुनौतियां तो है ही लेकिन प्रगति के द्वारा भी खोलता है जहां मशीनों द्वारा रोगों को तुरंत विश्लेषित करने की क्षमता हमें आती है तो शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों तक ज्ञान की पहुंच आसानी से बन सकती है नए अविष्कार नई जानकारियां सभी क्षेत्रों में उत्पादन से लेकर कृषि के क्षेत्र में इसके महत्वता को स्वीकारा जा रहा है। लेकिन यह हमारे लिए सिर्फ साधन मात्र होना चाहिए इसका इस्तेमाल हमारे ऊपर निर्भर है हम इसके साथ आगे बढ़ना चाहते हैं इससे देश की प्रगति में योगदान दे सकते हैं यह हमारे लिए एक हमसफ़र हो सकता है लेकिन हमारा मालिक नहीं बनने देना इसके लिए डाटा सेंटर बनाने के लिए लाखों लीटर पानी का उपयोग किया जाता है जो कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है । इससे निकलने वाले रेडिएशन भी नुकसानदायक है। इसका विवेक पूर्ण इस्तेमाल जरूरी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोजगार की प्रकृति बदलेगा रोजगार को खत्म नहीं करेगा एआई का प्रयोग मार्गदर्शन की तरह होना चाहिए ।मनुष्य का मानसिक विकास इसके द्वारा बाधित होने लगता है उसमें सोचने समझने की क्षमता कम होती जाती है उस पर निर्भरता हमारी बढ़ती जा रही है। इसका सुरक्षित उपयोग सीमित उपयोग ही हमें विकासपथ पर ले जा सकता है। इसका उपयोग हर जगह सुरक्षा प्रदान कर सकता है देश की सुरक्षा के लिए सेना में उपयोग, देश की वित्तीय सुरक्षा , घरों की, उद्योगों की सुरक्षा आज आसानी से हो सकती है। तो वहीं भ्रामक समाचार देश में अशांति से लेकर समाज में नफरत फैला सकते हैं हमारी चिंता यह है कि यह भस्मासुर ना बन जावे अतः इस पर सरकार को सख्त नियम बनाना होंगे इसका उपयोग सीमित करना होगा। एक प्रतियोगी ने कहा कि नव सृजन ही मानव के विकास की गाथा है विकास विज्ञान के बूते आया है लेकिन उसका नियंत्रण मानव के हाथ में रहना चाहिए। मानव की कल्पना शीलता सृजनता मशीन नहीं छीन सकती और शिक्षक और मानव की भूमिका कभी कम ना होगी।
प्रतियोगिता प्रमुख ज्योति तोमर एवं संयोजिका वृंदा गोड सरिता मंगवानी ने बताया कि इस प्रतियोगिता में 25 अधिक विद्यालयों के शिक्षकों ने भाग लिया शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं देवी अहिल्या के चित्र पर माल्यार्पण के द्वारा हुई अतिथि के रूप वैष्णव महाविद्यालय के प्रिंसिपल डॉक्टर परितोष अवस्थी एवं डॉ रेनू झा थी निर्णायक के रूप में पत्रकारिता विद्यालय की प्रमुख डा.सोनाली नरगुंडे, डॉक्टर ऋषिना नातू एवं सुनील पंड्या थे। प्रथम पुरस्कार शुभम शर्मा द्वितीय पुरस्कार पवन यादव तीसरा पुरस्कार मीनल पाटिल को मिला दीक्षा महाजन विनोद गढ़वाल कृष्णा सोनी को प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया। संचालन वृंदा गौड ने किया।
स्वागत भाषण शरयु वाघमारे ने दिया निर्णायक को का परिचय अर्चना गोजर वर्षा शर्मा वह सीमा नायक ने दिया अतिथि परिचय मोनापाल सरिता मंगवानी ने दिया कार्यक्रम में कार्यक्रम में अतिथि स्वागत मोनिका सबनीश उषा दवे विनीता धर्म शांत सोनी प्रकाश परवानी अविनाश भांड सुधीर देड़गे निलेश केदारे, लोकेंद्र वर्मा ने किया। आभार ज्योति तोमर ने माना।


