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धर्म को सीमित न रखें, धर्म हमारे मरने के बाद भी जिंदा रहेगा – राष्ट्रसंत सुधासागर म.सा.

धर्म को सीमित न रखें, धर्म हमारे मरने के बाद भी जिंदा रहेगा – राष्ट्रसंत सुधासागर म.सा.

दलाल बाग में चल रहे चातुर्मास की विशाल धर्मसभा में उमड़ रहा देशभर से आए साधकों का सैलाब – रविवार को होगी रोचक स्पर्धा

 

इंदौर। संसार में हमारा सबसे बड़ा शत्रु कोई और नहीं, हमारा कर्म ही है। कर्म से बड़ा न कोई शत्रु है न कोई मित्र। दुनिया से डरें या न डरें लेकिन कर्म करते समय अपने कर्म से जरुर डरें। भगवान से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि वे कभी किसी से नाराज होते ही नहीं हैं। भगवान की हम कितनी ही सेवा करें या न करें, वे कभी हमसे न तो खुश होंगे और न ही नाराज क्योंकि वे इन सब से ऊपर उठ गए हैं। भगवान का अवलम्बन लेकर हम भी अपना भाग्य बदल सकते हैं। औषधि केवल बीमार लोगों को ही दी जाती है, स्वस्थ्य लोगों को उसकी कोई जरूरत नहीं। यह चातुर्मास और प्रवचन भी ऐसे लोगों के लिए है जिन्हें सुधरने और सुधारने की जरूरत है। धर्म बहुत महत्वपूर्ण तत्व है। हम सब संकल्प लें कि हमारे धर्म करने से अधिक लाभ हमारे बच्चों के धर्म करने से होगा और धर्म बचेगा। इससे धर्म की प्रभावना निरंतर बढती रहेगी। धर्म को अपने तक सीमित न रखें, धर्मात्मा बनें क्योंकि धर्म हमारे मरने के बाद भी जिन्दा रहेगा। धर्म ही हमारे साथ जाएगा, बाकी कुछ नही।

संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज ने गुरुवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल विद्या-सुधा सत्संग मंडप में चल रहे चातुर्मास की महती धर्मसभा में उपस्थित समाज बंधुओं को संबोधित करते हुए उक्त दिव्य और प्रेरक आशीर्वचन दिए। राष्ट्रसंत के प्रवचनों की अमृत वर्षा का लाभ लेने के लिए दलाल बाग में दिनोंदिन भक्तों का मेला जुट रहा है। प्रवचन शुभारम्भ के पूर्व दिगम्बर जैन जावरावाला मंदिर पलासिया महिला मंडल की बहनों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। संत शिरोमणि आचार्य प.पू. विद्यासागर महाराज की महापूजा भी की गई। आचार्यश्री के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन का कार्यक्रम भी हुआ। समाजसेवी अशोक-रानी डोसी ने श्रीफल अर्पित किए। शांतिधारा का लाभ विवेक जैन, मुकेश जैन, देवेन्द्र परिवार द्वारा लिया गया। संचालन सोनाली जैन और मुक्ता जैन ने किया। सभी साधकों की अगवानी चक्रवर्ती नवीन-शिवानी गोधा, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद-अंतिका गोधा परिवार द्वारा की गई। कल शाम जिला न्यायाधीश कुलदीप जैन ने प.पू. राष्ट्रसंत से शुभाशीष प्राप्त किए।

रविवार को ‘सुधा का सागर’ पर आधारित परीक्षा – सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा ने बताया कि रविवार 9 अगस्त को ‘सुधा का सागर’ पुस्तक पर आधारित रोचक प्रश्नोत्तरी स्पर्धा का आयोजन वरणीश्री गंभीर सागर म.सा. के निर्देशन में दलाल बाग पर होगा, जिसमें 5 से 16 वर्ष तक की आयु के बच्चे और 70 से 80 वर्ष तक आयु के प्रतिभागी अलग-अलग श्रेणी में भाग ले सकेंगे। चातुर्मास समिति के प्रमुख नवीन गोधा, हर्ष जैन, आकाश कोयला ने बताया कि स्पर्धा को लेकर समाज बंधुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार भी प्रदान किए जाएँगे। चातुर्मास के दौरान दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी होंगे।

राष्ट्रसंत ने अपने आशीर्वचन में कहा कि याद रखें कि जीवन में कभी माता-पिता और गुरु के सामने झूठ मत बोलना। यदि कोई गलत काम किया हो तो इनके सामने सच बोलकर माफ़ी मांग लेना, ये सभी आपको अपनी नजरों में उठा लेंगे। दूसरी तरफ गुरु ने यदि आपको छोड़ा तो ऐसे डूबेंगे, जैसे रामजी ने समुद्र में पत्थर छोड़ा और वह डूब गया। इस पंडाल में पापियों को सबसे पहले जगह मिलना चाहिए। जो सात्विक हैं उन्हें सुधारने के लिए प्रवचन की कोई जरूरत नहीं। प्रवचन सुनकर शराबी की शराब छूट जाए, जुआरी जुआ खेलना छोड़ दे तो प्रवचन के लाभ का पता चलेगा। तुम्हारे कल्याण की गारंटी मैं लेता हूँ, यदि तुम अपने बेटे को मंदिर के दर्शन कराओगे तो एक जवान मुनि के बन जाने से धर्म सौ वर्ष तक बढ़ जाता

है।

 

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