भगवन’ ने शिक्षा और संस्कारों को आगे बढ़ाने में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित बनाए रखा-शहर के अनेक संतों ने सुनाए संस्मरण
विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी गिरिजानंद सरस्वती के 15वें पुण्य स्मरण दिवस पर पुष्पांजलि
इंदौर। ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्मलीन स्वामी गिरिजानंद सरस्वती ‘भगवन‘ का सम्पूर्ण जीवन धर्म, समाज, संस्कृति और राष्ट्र की सेवा में ही समर्पित रहा। उनका चिंतन जीवनभर धर्म और संस्कृति को आगे बढ़ाने में लगा रहा। शिक्षा और संस्कारों को आगे बढ़ाने और वेदपाठी ब्राह्मण बच्चों को मार्गदर्शन देने में उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित बनाए रखा। उनका जीवन चरित्र प्रेरक और अनुकरणीय रहा। आडम्बर और प्रदर्शन से दूर रहने के कारण उनके सदकर्मों की सुगंध युगों-युगों तक बनी रहेगी।
विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी गिरिजानंद सरस्वती ‘भगवन‘ के 15वें पुण्य स्मरण दिवस पर बुधवार को सैकड़ों भक्तों, शिष्यों एवं शहर के प्रमुख संतों ने उनके मंदिर एवं उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं भावांजलि समर्पित करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर वृन्दावन से आए महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती, वीर अलीजा हनुमान मंदिर के प्रमुख ब्रह्मचारी पवनानंद, अखंड धाम के महामंडलेश्वर डॉ.स्वामी चेतन स्वरूप, गजासीन शनि मंदिर के महामंडलेश्वर दादू महाराज, खाटू श्याम मन्दिर अम्बिकापुरी के महामंडलेश्वर गोपाल दास महाराज, अन्नपूर्णा आश्रम के आचार्य पं. किशोर शर्मा, सहित शहर के अनेक प्रमुख संतों और विद्वानों ने आश्रम पहुंचकर पुज्य ‘भगवन‘ को पुष्पांजलि एवं भावांजलि समर्पित की। शहर के प्रमुख विद्वान आचार्य पं. कल्याणदत्त शास्त्री, आचार्य पं. रामचंद्र शर्मा वैदिक, आचार्य पं. जुगल किशोर शास्त्री, पं. राजाराम पाठक, पं. जमनाप्रसाद शास्त्री, पं. महेश शास्त्री सहित अनेक विद्वानों का सम्मान भी किया गया। इसके पूर्व आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य एवं आचार्य पं. राजेश शर्मा के निर्देशन में न्यासी मंडल के सदस्यों ने एक हजार कन्याओं, 500 सौभाग्यवती, 31 वैदिक विद्वानों, 700 वेदपाठी बटुकों और 125 संतों, महंतों एवं महामंडलेश्वरों का पूजन कर उन्हें श्रद्धा निधि भी समर्पित की। इसके पूर्व पूज्य ‘भगवन‘ के मंदिर में पाद पूजन, षोडशोपचार पूजन, अभिषेक, कन्या पूजन, संत एवं भूदेव पूजन के बाद आरती के अनुष्ठान भी सौल्लास संपन्न हुए। प्रारंभ में आश्रम परिवार की ओर से मुंबई के रवि बूबना, सुरेश शाहरा, पं. दिनेश शर्मा, राजेन्द्र महाजन, राम ऐरन, रमेशचंद्र राठौर, रमेश पसारी, डॉ. संजय पंडित, सुश्री ममता शुक्ला, रेणु गुप्ता आदि ने सभी अतिथियों एवं संतों की अगवानी की।
पितृ पर्वत पर पौधरोपण – हरियाली अमावस्या के उपलक्ष्य में पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय मित्र मंडल की ओर से महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य में पितृ पर्वत पर सैकड़ों शिष्यों और भक्तों ने रिमझिम फुहारों के बीच 200 से अधिक पौधे रोपे वहीं सुबह आश्रम आने वाले भक्तों को भी तुलसी एवं बिल्व पत्र के पौधे भेंट किए गए।
शिष्यों ने सजाया मंदिर – आश्रम स्थित मां ललिता पराम्बा के मंदिर में भगवती को 56 भोग भी समर्पित किए गए। ‘ भगवन ‘ के पुण्य स्मरण दिवस पर उनके शिष्यों ने मंदिर का गुलाब, मोगरा, एवं रजनीगंधा के फूलों से मनोहारी श्रृंगार किया था। ‘भगवन‘ की आराध्य मां पराम्बा त्रिपुर सुंदरी भगवती का नयनाभिराम श्रृंगार तो जिसने भी देखा, देखता ही रह गया। ‘भगवन‘ को पुष्पांजलि समर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश में कार्यरत शिष्य भी आए थे। कन्या पूजन एवं कन्या भोज का आयोजन भी किया गया। महाप्रसादी में दो हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने गिरिजानंद सरस्वती वेद वेदांग विद्यापीठ के वेदपाठी बटुकों का पूजन कर उन्हें दक्षिणा भेंट की।
केदारखंड स्थित विद्याधाम पर भी पुष्पांजलि- केदारखंड, गुप्त काशी स्थित श्री श्रीविद्याधाम आश्रम में भी आज पूज्य ‘भगवन‘ के स्मरण दिवस पर सैकड़ों भक्तों ने पादुका पूजन कर कन्याओं एवं जरूरतमंदों को भोजन कराया। सुबह आश्रम के 11 विद्वानों ने रुद्राभिषेक एवं षोडशोपचार पूजन की विधि संपन्न की। ‘भगवन‘ के मंदिर में भी आसपास के ग्रामीणों ने पुष्पांजलि समर्पि
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