स्वयं को महान, ज्ञानी और श्रेष्ठ मानना सबसे बड़ी भूल – सुधासागर म.सा.
हम भले ही मन्दिर और भगवान पर पीएच.डी कर लें फिर भी न तो भगवान बन पाएँगे और न ही भक्त – दलाल बाग की धर्मसभा में प्रेरक आशीर्वचन
इंदौर। आज सबसे बड़ी विसंगति यह है कि हम अपनेआप को महान, ज्ञानी और दूसरों से श्रेष्ठ मान बैठे हैं। हर व्यक्ति खुद को श्रेष्ठ बताने से नहीं चूकता लेकिन याद रखें कि हीरा कभी अपने मुंह से नहीं कहता कि मेरा मोल लाखों में है। जो व्यक्ति स्वयं को महान, ज्ञानी और श्रेष्ठ मानता है वह उसकी सबसे बड़ी भूल होती है। हम दुनिया के सामने कुछ भी हों लेकिन जिस दिन भगवान और गुरु के चरणों की धूल बन जाएँगे और यह स्वीकार कर लेंगे कि चरणों की धूल ही सबकुछ है, उस दिन हम सबकुछ प्राप्त कर लेंगे। इसके विपरीत यदि हम गुरु की सभा में यह मानकर बैठेंगे कि मैं ही सबसे बड़ा ज्ञानी और अनुभवी हूँ तो हमारा कल्याण रुक जाएगा। हमारे कल्याण का सबसे सहज मंत्र नमोकार मंत्र है। मन्त्र की कीमत तभी महत्वपूर्ण होगी जब हम उसे गुरुदेव के श्रीमुख से सुनेंगे।
संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज ने बुधवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल विद्या-सुधा सत्संग मंडप में चल रहे चातुर्मास की महती धर्मसभा में उपस्थित भक्तों को आशीर्वचन देते हुए उक्त दिव्य एवं प्रेरक विचार व्यक्त किए। प्रारम्भ में श्रीपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर महिला मंडल अंजनी नगर ने मंगलाचरण का लाभ लिया। राष्ट्रसंत को दिगम्बर जैन सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोद और अशोल डोसी परिवार ने शास्त्र भेंट किया। दीप प्रज्वलन भूपेंद्र जैन, विपुल बांझल, कमल चैलेंजर एवं अखिलेश सोंधिया ने किया। मंच का संचालन सौरभ शचि बडजात्या ने किया और आभार माना अर्चना दिलीप गोधा ने। आयोजन समिति की ओर से नवीन गोधा, मनीष गोधा, अशोक डोसी, हर्ष जैन, आकाश जैन कोयला आदि ने देशभर से आए सभी साधकों की अगवानी की। चातुर्मास के दौरान दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा जारी है। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी होंगे।
दलाल बाग पर मनेगा आज़ादी का जश्न – स्वतन्त्रता दिवस की वर्षगांठ पर राष्ट्रसंत प.पू. सुधासागर म.सा. के सानिध्य एवं उनकी प्रेरणा से देशभक्ति से ओतप्रोत “माँ तुझे सलाम” का भव्य आयोजन होगा। इसके तहत सुबह 7.15 बजे श्रीआदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर छत्रपति नगर से दलाल बाग स्थित विद्या-सुधा मंडप तक राष्ट्रसंत प.पू. विद्यासागर महाराज के सानिध्य में तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। दलाल बाग पर मंगलाचरण के तहत नृत्य के माध्यम से शानदार प्रस्तुति होगी। सुबह 7.45 बजे ध्वजा रोहण एवं ध्वज वन्दन तथा 8.15 बजे से राष्ट्रसंत के विशेष प्रवचन होंगे। उत्सव के मुख्य संयोजक सपना-मनीष गोधा, तृप्ति-हर्ष जैन, शिवानी-नवीन गोधा, रानी-अशोक डोसी, अंतिका-आनंद गोधा, दीपिका-आकाश जैन कोयला, संध्या-धर्मेन्द्र जैन, सोनम-गिरीश जैन, शचि-सौरभ बडजात्या, लीना-अक्षय कासलीवाल, अनिता-संजय सांवरिया एवं शिल्पी-राहुल जैन स्पोर्ट्स मनोनीत किए गए हैं। महिलाऐं केशरिया या हरी सारी तथा पुरुष वर्ग सफ़ेद परिधान में आएंगे। समाज बंधुओं से इस आयोजन में बच्चों को लेकर आने का विशेष आग्रह किया गया है।
राष्ट्रसंत ने महती धर्मसभा में कहा कि जो लोग स्वयं को ज्ञानी और बुद्धिमान समझते हैं या शास्त्र पढ़ते समय गुरु के सामने खुद को श्रेष्ठ मानते हैं, ऐसे लोगों की दुर्गति रावण के समान होगी। नमोकार मंत्र हम सबको आता है लेकिन गुरु के श्रीमुख से सुनना ज्यादा कल्याणकारी होता है। विद्वान के पास ज्ञान हो सकता है लेकिन उनके पास ज्ञान की सिद्धि नहीं होती। हम भले ही मन्दिर और भगवान पर पीएच.डी कर लें फिर भी न तो भगवान बन पाएँगे और न ही भक्त। मेरे गुरु आचार्य प.पू. विद्या सागर म.सा. से कभी किसी को न लक्ष्मी यंत्र दिया न कुबेर यन्त्र दिया उन्होंने केवल सिर्फ ओम कहा, यही सबसे बड़ा लक्ष्मी यंत्र है। यह संकट मोचक यंत्र है। हमें अपने गुरु पर विश्वास करना होगा। हमें अपने सच्चे गुरु और देव की पहचान करना होगी। जीवन में हमेशा अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता का भाव रखेंगे तो हमारे कल्याण का मार्ग खुला रहेगा। हमेशा यह भाव रखें कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे चातुर्मास में कलश रखने का अवसर मिला है, उस दिन से देखना कि आपका कल्याण कैसे होता है। मंगल कलश और भक्ति कलश का महत्व सबसे अधिक होता है। हमारे यहाँ भोजन करने वाले के प्रति यदि हम आभार मानेंगे तो हमारे अन्न क्षेत्र के भंडार भरे रहेंगे।


