श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर
भूतेश्वर महादेव की शाही सवारी में 200 से अधिक मंचों
से हुई पुष्प वर्षा, 21 लाख बिल्व पत्रों से पूजा-अर्चना
दस कि.मी. क्षेत्र में घूमी भगवान भूतेश्वर की सवारी – 87 वर्ष पुरानी परम्परा का निर्वाह – पूरे यात्रा मार्ग की सफाई व्यवस्था भी साथ चली

इंदौर, । पंचकुइया स्थित करीब 300 वर्ष प्राचीन श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर की शाही सवारी ने सावन के अंतिम सोमवार की शाम को समूचे पश्चिम क्षेत्र को भगवान भूत भावन की भक्ति से सराबोर बनाए रखा। पूरा क्षेत्र इस शाही सवारी के कारण शिवमय बना रहा। इस बार यात्रा मार्ग पर 200 से अधिक स्वागत मंचों, तोरण द्वारों और भक्तों द्वारा किए गए स्वागत ने अब तक के सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए। दूल्हे के रूप में सजे-धजे भूतेश्वर महादेव जब शाही रथ और 5 क्विंटल फूलों से सजी पालकी में विराजित होकर अपने भक्तों को दर्शन देने निकले तो सैकड़ों श्रद्धालु भूत, पिशाच, चुड़ैल और ओघड़ के स्वरूप में साथ हो गए। इस बार 51 लाख बिल्व पत्र से भगवान भूतेश्वर महादेव की पूजा अर्चना का नया कीर्तिमान भी बन गया।
शाही सवारी में ढाई सौ से अधिक बारातियों की टीम बग्घी, घोड़े और बैंड-बाजों के साथ ढोल-ताशे तथा नगाडों की मंगल ध्वनि के बीच दूल्हे शिवजी के साथ नाचते गाते हुए चलती रही। यात्रा पंचकुइया स्थित मंदिर प्रांगण से जैसे ही प्रारंभ हुई, समूचा काफिला हर-हर महादेव और भगवान भूतेश्वर के जयघोष से गूंज उठा। श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी पं. श्री हरीशानंद तिवारी एवं आचार्य पं. यतीन्द्र तिवारी ने बताया कि भगवान भूतभावन भोलेनाथ इस यात्रा में दूल्हे के रूप में करीब 5 क्विंटल सुगंधित फूलों से सुसज्जित रथ और बिल्व पत्रों से सुसज्जित पालकी में विराजित होकर अपने भक्तों का कुशलक्षेम जानने और दर्शन देने निकले। इस बार मंदिर पर सावन के पहले दिन से प्रतिदिन एक लाख बिल्व पत्रों से भगवान भूतेश्वर की पूजा-अर्चना का क्रम चल रहा है।
51 लाख बिल्व पत्र से पूजा-अर्चना का कीर्तिमान – पं. यतीन्द्र तिवारी ने बताया कि सोमवार को पिछले 88 वर्षों से चल रही परम्परा का निर्वाह करते हुए इस बार भी भूतेश्वर भगवान भक्तों के बीच पहुंचे तो 200 से अधिक स्वागत मंचों से पुष्प वर्षा के साथ बिल्व पत्रों से भी पूजा-अर्चना होती रही। घरों की छतों एवं बालकनियों से भी भगवान शिवाशिव के दर्शन पूजन का सिलसिला पूरे समय तक चलता रहा। बिल्व पत्रों से पूजा-अर्चना का इस बार नया कीर्तिमान बनने जा रहा है जब प्रतिदिन एक लाख के हिसाब से गत 29 जुलाई से आज तक 27 लाख बिल्व पत्र समर्पित किए जा चुके हैं जबकि आज निकली शाही सवारी में करीब 21 लाख बिल्व पत्रों से पूजा-अर्चना के कारण यह आंकड़ा 47 लाख तक पहुँच गया है। अब सावन के शेष 4 दिनों में 4 लाख बिल्व पत्र सहित कुल 51 लाख बिल्व पत्र से पूजा अर्चना का नया कीर्तिमान बन जाएगा।
यात्रा मार्ग पर हुआ भव्य स्वागत – यात्रा में भगवान भूतेश्वर महादेव सुसज्जित पालकी में शोभायमान होकर अंतिम चौराहा से बड़ा गणपति, टोरी कार्नर, गौराकुंड, खजूरी बाजार होते हुए राजबाड़ा, यशवंत रोड से जवाहर मार्ग ,नरसिंह बाजार, मालगंज, राजमोहल्ला चौराहा से अंतिम चौराहा होते हुए पुनः मंदिर पहुंचें। इस रथ को मंदिर के सेवादार एवं सैकड़ों श्रद्धालु अपने हाथों से खींचते हुए चले। मार्ग में जगह-जगह भक्तों के लिए स्वल्पाहार, फलाहार, फल, आईस्क्रीम, मिठाई एवं अन्य प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई थी। मंदिर पर सामूहिक आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ यात्रा का समापन हुआ। पूर्व विधायक आकाश विजय वर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला, राष्ट्रकवि पं. सत्यनारायण सत्तन एवं अनेक पार्षदों सहित शहर के अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधि, श्रद्धालु एवं विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी यात्रा में शामिल हुए। यात्रा ने करीब 10 किमी मार्ग का भ्रमण किया।
उल्लेखनीय है कि पिछले 87 वर्षों की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप भूतेश्वर महादेव की इस सवारी की शुरुआत सन 1938 में सबसे पहले श्रावण माह में बहुत छोटे स्तर पर हुई थी, लेकिन भक्तों की आस्था और श्रद्धा का दायरा लगातार व्यापक होता चला गया और अब यह यात्रा पश्चिम क्षेत्र की पहचान के रूप में स्थापित हो चुकी है।


