Eternal Hinduism

भक्ति अडिग और अखंड रहेगी तो रक्षा के लिए भगवान को आना ही पड़ेगा : पं. नागर

इंदौर(विनोद गोयल)। भगवान का अवतरण भक्तों की रक्षा और दुष्टों के नाश के लिए हुआ है। उनकी लीलाओं में प्राणीमात्र के प्रति सदभाव और कल्याण का चिंतन होता है। संसार की दृष्टि से भगवान की लीलाओं का चाहे जो अर्थ-अनर्थ निकाला जाए, यह शाश्वत सत्य है कि यदि हमारी भक्ति अडिग और अखंड रहेगी तो भगवान को रक्षा के लिए आना ही पड़ेगा। भक्ति निष्काम और निर्दोष होना चाहिए। भक्ति मनुष्य को निर्भयता प्रदान करती है।
ये दिव्य विचार हैं मालवा के प्रख्यात भागवत मर्मज्ञ आचार्य पं. ब्रजकिशोर नागर के, जो उन्होंने गुरुवार को धार रोड स्थित धरावरा धाम आश्रम पर महंत शुकदेव दास महाराज के सानिध्य में चल रहे मानस सम्मेलन एवं भागवत ज्ञान यज्ञ में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
गोवर्धन पूजा एवं बाल लीला का उत्सव
कथा में गोवर्धन पूजा एवं बाल लीला का उत्सव भी मनाया गया। व्यास पीठ का पूजन नानूराम चौधरी के साथ ललित अग्रवाल, डॉ. सुरेश चोपड़ा, गोपाल गोयल, गोविंद मंगल, अशोक कुमावत, रमेश मिश्रा, सीताराम नरेडी एवं रेखा श्रीकांत शर्मा आदि ने किया। कथा में शुक्रवार को कृष्ण-रुक्मणी विवाह का दिव्य उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। यह अनुष्ठान 28 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 1 से 5 बजे तक जारी रहेगा।
पं. नागर ने कहा कि भगवान की भक्ति कभी निष्फल नहीं होती।

बृज भूमि कृष्ण लीलाओं की साक्षी
कृष्ण की बाल लीलाएं पूतना वध से शुरू होकर कंस वध तक जारी रही और सब में भक्तों के कल्याण का ही भाव है। बृज की भूमि आज भी भगवान की लीलाओं की साक्षी है जहां हजारों वर्ष बाद भी गोपीगीत, महारास और कालियादेह नाग के मर्दन के जीवंत उदाहरण मौजूद है। हमारी संस्कृति में कुछ भी कपोल-कल्पित नहीं है। जितने प्रसंग हमारे धर्मशास्त्रों में बताए गए है, उन सबके प्रमाण आज भी देखे जा सकते हैं। यह भारत भूमि का ही चमत्कार है कि यहां सबसे ज्यादा देवी – देवता अवतार लेते है। भक्तों की भी यही भूमि है और लीलाओं का अलौकिक मंचन भी भारत की पुण्यधरा पर ही होता है।

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