जन-जन की आस्था के केंद्र बिंदु हैं राम और कृष्ण : जगदगुरु चैतन्य महाराज
गीता भवन में मारवाड़ी माहेश्वरी प्रगति मंडल द्वारा आयोजित भागवत ज्ञान यज्ञ में धूमधाम से मना कृष्ण जन्मोत्सव-आज गोवर्धन पूजा
इंदौर, । भारत भूमि अवतारों की भूमि है। सनातन संस्कृति में नदी, पपर्वत, वृक्ष और जीवों को भी पूजनीय और वन्दनीय माना गया है। दुनिया के किसी अन्य देश में ऐसे विराट चिंतन का प्रमाण नहीं मिलता। भगवान जब भी अवतार लेते हैं, सज्जनों का कल्याण और दुष्टों का विनाश ही होता है। राम और कृष्ण अपनी लीलाओं से पृथ्वी लोक का कल्याण करने के लिए ही अवतरित हुए हैं। आज भी ब्रज क्षेत्र के कण-कण में राधा और कृष्ण की सुगंध रची-बसी है। राम और कृष्ण जन-जन की आस्था के केंद्र बिंदु हैं।
ये दिव्य विचार हैं वृन्दावन के जगदगुरु श्री गोपेश्वर चैतन्य महाराज के, जो उन्होंने बुधवार को मनोरमागंज स्थित गीता भवन पर मारवाड़ी माहेश्वरी प्रगति मंडल की मेजबानी में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में श्रीराम एवं कृष्ण जन्म प्रसंगों की व्याख्या के दौरान व्यक्त किए। कथा में कृष्ण जन्म का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। समूचे कथा स्थल को विशेष रूप से श्रृंगारित किया गया था। प्रभु श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग पर “नंद में आनंद भयो जय कन्हैया लाल की” जैसे भजन पर समूचा सभागृह नाच उठा। कथा शुभारंभ के पूर्व मंडल के अध्यक्ष रामकिशोर राठी, बजरंगलाल मालानी, कपिल लाहोटी, मनोज धूत, गौरीशंकर लोहिया, श्रीकांत गिलडा, गिरिराज बंग, रामवल्लभ भूतड़ा, रामप्रसाद चांडक, श्याम सुंदर कोठारी, रामदेव बलदेवा आदि ने सपत्नीक व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी यजमान समूह के रामविलास राठी, राधेश्याम मालानी, रामप्रसाद जखेटिया, रामअवतार पलोड़, सुरेश नुहाल, सुनील मूंदड़ा आदि ने की।
गीता भवन में जगदगुरु श्री गोपेश्वर चैतन्य महाराज के श्रीमुख से 13 जून तक प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 7 बजे तक भागवत कथामृत की वर्षा हो रही है। कथा में 11 जून को बाल लीला, गोवर्धन पूजा एवं 56 भोग, 12 को महारास एवं रुक्मणी विवाह, 13 को सुदामा चरित्र एवं व्यास पूजा तथा रविवार 14 जून को सुबह 9 बजे पूर्णाहुति, यज्ञ एवं पूजन के साथ कथा का विराम होगा।
विद्वान वक्ता ने विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या के दौरान कहा कि भगवान की सभी कथाएँ जीवन को सदगुणों से श्रृंगारित करती हैं। हमारे व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण करने में सत्संग और भगवान की कथाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भगवान कृष्ण की सभी लीलाओं में प्राणी मात्र के कल्याण का भाव मौजूद है। उन्होंने हजारों वर्ष पूर्ण अपनी लीलाओं के माध्यम से अनेक ऐसे सन्देश दिए हैं जो हर युग में प्रासंगिक माने गए हैं। राम और कृष्ण भारत भूमि और सनातन धर्म के प्राण तत्व
हैं।


