इंदौर। कृष्ण यदि कण-कण में मौजूद हैं तो राम भी रोम-रोम में व्याप्त हैं। राम और कृष्ण इस देश के जनमानस के प्राणतत्व हैं। राम मर्यादा पुरूषोतम हैं तो कृष्ण लीलाधर। राम और कृष्ण भारत भूमि के पर्याय हैं। इन दोनों अवतारों के बिना भारतभूमि की कल्पना भी संभव नहीं है। राम ने जहां समाज को अंत्योदय का संदेश दिया है वहीं कृष्ण ने कंस प्रवृत्ति का नाश कर आतंकवाद के खात्मे का सन्देश दिया है। धर्म की जब-जब हानि होती है, भगवान भारत भूमि पर ही अवतार लेते हैं। यदि हमने समय को सही ढंग से नहीं काटा तो समय हमें काटेगा।
ये दिव्य विचार हैं मालवा के प्रख्यात भागवत मर्मज्ञ आचार्य पं. ब्रजकिशोर नागर के, जो उन्होंने बुधवार को धार रोड स्थित धरावरा धाम आश्रम पर महंत शुकदेव दास महाराज के सानिध्य में चल रहे मानस सम्मेलन एवं भागवत ज्ञान यज्ञ में उपस्थित श्रद्धालुओं को कृष्ण जन्मोत्सव पर संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

‘नंद में आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की
कथा में आज राम एवं कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाए गए। व्यास पीठ का पूजन नानूराम चौधरी के साथ विष्णु चौधरी, ललित अग्रवाल, डॉ. सुरेश चोपड़ा, सीताराम नरेडी, मांगीलाल ठाकुर, देवेन्द्र सांखला एवं श्रीमती रेखा श्रीकांत शर्मा आदि ने किया। कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे। जैसे ही वसुदेव और देवकी के साथ सुसज्जित टोकनी में रखकर बालरूप कृष्ण को मंच पर लाया गया, समूचा कथा पांडाल भगवान के जयघोष से गूंज उठा। ‘नंद में आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ भजन पर श्रद्धालु थिरक उठे। कथा में गुरुवार को गोवर्धन पूजा का उत्सव मनाया जाएगा। यह दिव्य अनुष्ठान 28 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 1 से 5 बजे तक जारी रहेगा। अनुष्ठान में आसपास के 25 गांवों के श्रद्धालु भागीदार बने हुए हैं।
भारतीय समाज मर्यादाओं से बंधा हुआ
पं. नागर ने कहा कि भगवान कृष्ण ने समाज की राक्षसी प्रवृत्तियों के नाश के लिए ही अवतार लिया है। भगवान राम भी ऐसे अवतार हैं जिनके संपूर्ण जीवन क्रम में कहीं भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं हुआ है। भारतीय समाज मर्यादाओं से बंधा हुआ है। दुनिया के सारे विवाद वहां पैदा होते है, जहां मर्यादा की लक्ष्मण रेखा पार कर ली जाती है। कृष्ण और राम के चरित्र आज हजारों वर्ष बाद भी वंदनीय और पूजनीय बने हुए हैं, क्योंकि समाज के गौरव और अस्मिता को बढ़ाने तथा दुष्टों का नाश कर भक्तों की रक्षा करने का संकल्प आज भी अनुभूत होता है।


