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सदाबहार नगमो से सजी शाम में महकी आकांक्षा

*सदाबहार नगमो से सजी शाम में महकी आकांक्षा*

इंदौर। गीत संगीत का कार्यक्रम हो और तालियां ना बजे और लोगों की आंखों में पानी ना भर आए, ऐसा संभव ही नहीं। पुरानी यादों में खोते हुए श्रोता कान और आंखों के माध्यम से अपने आप को संगीत के नशे में डूबते उतरते नजर आए। मौका था महेश नवमी उत्सव के अंतर्गत संस्था माहेश्वरी संस्कृति के द्वारा आयोजित ख्यात गायिका आकांक्षा जाचक की लता मंगेशकर सभागृह में आयोजित संगीत संध्या का। नितिन शेट्टी के संगीत संयोजन पर जब आकांक्षा जाचक ने ब्लैक एंड व्हाइट जमाने के गीत ‘जवां है महोब्बत’ और ‘अजीब दास्तां है’ यह सुनाया तो पुराने जमाने की याद ताजा हो गई। वहीं ‘पल पल दिल के पास’ ‘दम मारो दम’ ‘तेरे बिना जिंदगी से शिकवा नहीं’ गीत एवरग्रीन 70 के दशक की याद दिला रहे थे ,और जब उन्होंने फिल्म हीरो का रेशमा द्वारा गाया गया ‘लंबी जुदाई’ गाया तो युवा वर्ग उस गाने को सुनकर अपने आपको मोहब्बत के इस गीत के करीब पाने लगा।

*रंभा हो रंभा हो ने मचाया धमाल*

संस्था के श्याम राजश्री माहेश्वरी व मुनीष किरण मालानी ने बताया कि जब उन्होंने उषा उत्थुप का ‘रंभा हो रंभा हो’ गाया तो युवा वर्ग के साथ-साथ अधेड़ वर्ग भी इसमें झूम कर नाचने लगा। ज्ञात रहे कि यह गाना अभी फिल्म धुरंधर में भी उपयोग में आया था, पारिवारिक गीतों के सफर में फिल्म हम साथ साथ हैं के गीत एवं 2000 के इरा का का गीत ‘सूरज हुआ मद्धम’, ‘कल हो ना हो’ आदि ने भी इस माहौल को रंगीन कर दिया वही लीजेंड को ट्रिब्यूट देते हुए आकांक्षा जी ने ‘एक प्यार का नगमा है’ भी सुनाया और देशभक्ति के गीतों से लोगों की आंखों में देश के लिए कुछ कर गुजरने की चमक दिखाई दी। उन्होंने जब सुनाया ‘ए गुजरने वाली हवा’ ,’संदेशे आते हैं’ तो लोगों की आंखों में पानी भर आया। उन्होंने तालियां बजाकर आकांक्षा जाचक का अभिनंदन किया। मुख्य अतिथि सुनील अनीता न्याती व रामेश्वर राजू बिनानी थे। कार्यक्रम समाप्ति पर आभार श्याम माहेश्वरी ने माना।

 

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