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Eternal Hinduism

जीवन की धन्यता तभी संभव है जब हम स्वयं मूल्यनिष्ठ, पुरुषार्थ करें – पं. मेहता

इंदौर(विनोद गोयल)।  हमारा जीवन कर्म प्रधान है। दुर्लभ मनुष्य जीवन की धन्यता तभी संभव है जब हम स्वयं को मूल्यनिष्ठ, सेवा प्रधान और जागरूक बनाने के लिए निरंतर सार्थक पुरुषार्थ