इंदौर(विनोद गोयल)। ऐतिहासिक धरती राजवाड़ा एक बार फिर सनातन आस्था और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर हो उठी, जब हिंदू नव वर्ष गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर भव्य “सूर्य अर्घ्य” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्कार भारती, लोक संस्कृति मंच और नगर निगम इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह ने परंपरा, भक्ति और कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और संस्कार भारती के ध्येय गीत से हुआ, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। लोक संस्कृति मंच के संयोजक शंकर लालवानी, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संस्कार भारती के कार्यकारी अध्यक्ष अविनाश मोतीवाले और पीयूष शर्मा ने आयोजन की गरिमा को और ऊँचाई दी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। बृजमोहन बमरीले के मधुर वायलिन वादन से लेकर सूर्य स्तुति की भावपूर्ण प्रस्तुति तक, हर क्षण भक्तिभाव से ओतप्रोत रहा। कथक नृत्यांगनाएँ प्राजक्ता दातार और प्रेशियस पाटीदार ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। सामूहिक रामधुन की सुरमयी लय ने पूरे वातावरण को भक्तिरस में डुबो दिया।

नववर्ष की मंगल बेला पर सजी आकर्षक रंगोली और पारंपरिक गुड़ी ने भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया गया, जिसने हर उपस्थित जन के मन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार किया। अंत में निमोली प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस भव्य आयोजन में संत समाज और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति भी रही। कैलाश विजयवर्गीय, तुलसीराम सिलावट, रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला और सुमित मिश्रा सहित अनेक गणमान्य नागरिक इस दिव्य क्षण के साक्षी बने।

संयोजक विलास सप्रे और सुधीर सूबेदार ने बताया कि संत स्वामी रामगोपाल दास महाराज, पवन दास महाराज, योगेंद्र महंत और रामचंद्र शर्मा की उपस्थिति ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया।
यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और एकता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा, जिसने हर हृदय में नववर्ष के लिए नई आशा और उत्साह का संचार कर दिया।


