भारतीय समाज की सबसे आदर्श और संस्कारित जोड़ी है राम-सीता की – पं. राहुल
विद्याधाम परिसर में आद्य गौड़ ब्राह्मण सेवा न्यास के मातृशक्ति प्रकोष्ठ की मेजबानी में मनाया गया राम–जानकी विवाह, आज वनवास प्रसंग

इंदौर। राम और सीता की जोड़ी भारतीय समाज की सबसे आदर्श और संस्कारित जोड़ी है। भारतीय नारी का सबसे श्रेष्ठ और आदर्श प्रतीक सीता के अलावा और कोई नहीं हो सकता। सीता लक्ष्मी का स्वरुप हैं और राम विष्णु के। हमारा दाम्पत्य जीवन कैसा होना चाहिए, यह देखना है तो राम और सीता के युगल को देखें जहाँ हर कदम पर स्नेह, सदभाव, विश्वास, त्याग और समर्पण जैसे अलंकरण नजर आते हैं। राम-सीता के युगल ने भारतीय सनातन संस्कृति में आदर्श मानक स्थापित किए हैं। भगवान कृपासिन्धु हैं और हम बिंदु। राम वही हो सकते हैं, जो सबमें रम जाए।
आचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री ने गुरुवार को विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम पर आद्य गौड़ ब्राह्मण सेवा न्यास के मातृशक्ति प्रकोष्ठ की मेजबानी में चल रही श्रीराम कथा में राम-जानकी विवाह प्रसंग की व्याख्या के दौरान उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। कथा में राम-सीता विवाह स्वयंवर का उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। रामजी बारात लेकर जनकपुरी पहुंचे तो राजा जनक सहित अनेक संतों ने उनकी अगवानी की। सीता द्वारा वरमाला पहनाते ही कथा स्थल भगवान के जयघोष एवं जय जय सियाराम के उद्घोष से गूंज उठा। मनोहारी भजनों पर नाचते गाते हुए भक्तों ने अपनी खुशियाँ व्यक्त की। न्यास के अध्यक्ष पं. दिनेश शर्मा ने बताया कि कथा शुभारंभ के पहले खाटू श्याम धाम के महामंडलेश्वर स्वामी गोपाल दास, वरिष्ठ समाजसेवी पं. कृपाशंकर शुक्ला, देवी प्रसाद शर्मा, डॉ. लोकेश जोशी, महेश शर्मा, हेमंत शर्मा, राजकिशोर शर्मा ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्याधाम परिवार की ओर से समाजसेवी सुरेश शाहरा, राजेंद्र महाजन, विभिन्न ब्राह्मण संगठनों की ओर से पं. विकास अवस्थी, पं. अखिलेश शर्मा एवं पं. अजय व्यास, विष्णु व्यास, लोकेश शर्मा आदि ने रामचरित मानस का पूजन किया। प्रकोष्ठ की भारती शर्मा एवं पिंकी शर्मा ने बताया कि विद्याधाम परिसर में श्रीराम कथा का यह दिव्य आयोजन 7 जून तक प्रतिदिन शाम 3.30 से 7.30 बजे तक चलेगा। कथा में शुक्रवार 5 जून को वनवास प्रसंग, शनिवार 6 जून को भरत मिलाप एवं रविवार 7 जून को राम राज्याभिषेक प्रसंग के साथ इस दिव्य अनुष्ठान की पूर्णाहुति होगी। भागवताचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री नेपाल सहित देश के चारों धाम पर भागवत कथा का दिव्य अनुष्ठान कर चुके है।
आचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि गृहस्थ जीवन की गाड़ी पति-पत्नी जैसे दो पहियों के संतुलन से ही चलती है। दोनों के बीच संतुलन और सामंजस्य के साथ एकदूसरे के प्रति प्रेम ,स्नेह और विश्वास भी होना चाहिए। पति-पत्नी के बीच समर्पण का स्वरुप दूध में पानी की तरह होना चाहिए जिसे कोई अलग नहीं कर सके। सम्पत्ति की चकाचौंध के बीच यदि हम अपनी संस्कृति को भी जिन्दा रखें तो घर-घर में रात-सीता जैसे आदर्श युगल बन सकते हैं। आज हजारों वर्ष बाद भी न तो राम जैसा कोई हुआ और न सीता जैसी कोई होगी। जहाँ राम हैं वहां विश्राम है।
61 मातृशक्ति के संकष्टी चतुर्थी व्रत का उद्यापन – आद्य गौड़ ब्राह्मण सेवा न्यास के मातृशक्ति प्रकोष्ठ की मेजबानी में पुरुषोत्तम मास की संकष्टी चतुर्थी व्रत करने वाली 61 माताओं के व्रत का सामूहिक उद्यापन भी किया गया। प्रकोष्ठ की भारती शर्मा एवं पिंकी शर्मा ने बताया कि 61 महिलाओं के साथ उनके करीब एक हजार रिश्तेदारों और समाज बंधुओं सहित करीब 1500 सदस्यों की मौजूदगी में विधि विधान के साथ चतुर्थी व्रत का उद्यापन किया गया। व्रतधारी महिलाओं को उपहार भी भेंट किए गए। विद्याधाम परिसर में इस कार्यक्रम के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थी। इस अवसर पर आद्य गौड़ ब्राह्मण सेवा न्यास के सभी पदाधिकारी एवं न्यास से जुड़े सभी प्रकोष्ठों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए और व्रतधारी महिलाओं के प्रति शुभकामनाएँ व्यक्त


