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जो जन्म-जन्म की वासना का विनाश करे वही विद्या – किरीट भाई

जो जन्म-जन्म की वासना का विनाश करे वही विद्या – किरीट भाई

तुलसी परिवार की मेजबानी में ब्रह्मऋषि किरीट भाईजी का जाल सभागृह में मना गुरु पूर्णिमा महोत्सव, अनेक जिलों के शिष्यों ने किया पूजन

 

इंदौर। गलियों और चौराहों की सफाई से ज्यादा मन की पवित्रता महत्वपूर्ण होती है। शरीर कभी पवित्र नहीं हो सकता। पवित्रता की पात्रता केवल मन को है। परमात्मा शरीर नहीं मन देखते हैं। उन्हें केवल हमारा पवित्र मन और आंसू चाहिए। शिक्षा का अर्थ केवल एजुकेशन नहीं है। जो जन्म-जन्म की वासना का विनाश करे वही विद्या है। बच्चों को संस्कार देना है तो माता-पिता को भी अपने व्यसन त्यागना होंगे। बच्चों का मन कोरा कागज होता है। आज के बच्चों को खिलौने नहीं, समय देने की जरूरत है। मौत छींक की तरह आती है और रुमाल जेब में ही रह जाता है। हीरे जैसा शरीर मिला है तो उसे किसी कबाड़खाने में मत बेच देना। भगवान ने हमें हाथ, पैर, मस्तिष्क, विवेक और शिक्षा जैसी संपदा दी है इसलिए अपने आप को कभी गरीब मत कहना। यदि हमने अपने जीवन को भक्ति से जोड़ लिया तो विश्वास करें कि कोई भी दुखी और दरिद्री नहीं हो सकता।

ये दिव्य विचार हैं प्रख्यात संत, ब्रह्मऋषि किरीट भाईजी के, जो उन्होंने शुक्रवार को तुलसी परिवार इंदौर के तत्वावधान में साउथ तुकोगंज स्थित जाल सभागृह में गुरू पूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित सत्संग, मनोरथ आरती, संकीर्तन, गुरू दीक्षा, प्रश्नोत्तरी, ठाकुरजी के स्नान एवं आरती सहित विभिन्न कार्यक्रमों में व्यक्त किए। प्रारंभ में तुलसी परिवार की ओर से सुनील मालू, संजय सोनी, मीतेश जोशी, राजेश नीमा, राजेश गुप्ता खादी कल्चर, जयप्रकाश भुराडिया, महेश जाजू आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। भाईजी का स्वागत करने के लिए राज्य के अनेक जिलों से श्रद्धालु और शिष्य आए थे। महोत्सव की शुरुआत गोपाल शर्मा एवं साथियों द्वारा गुरु वन्दना के साथ हुई। संचालन संजय सोनी ने किया और आभार माना सुनील मालू ने। इस अवसर पर उज्जैन, धार, देवास, खरगोन, खंडवा सहित आसपास के जिलों के शिष्य एवं भक्तों ने ठाकुरजी के पूजन एवं आरती में शामिल होकर दीक्षा भी प्राप्त की। भक्तों को उन्होंने आगामी दिसम्बर माह में 3 से 9 दिसम्बर तक भुज, कच्छ में होने वाली कनकधारा कथा के दिव्य आयोजन का न्योता भी दिया। सैकड़ों भक्तों ने नंदीवन भुज में विशाल गौशाला के निर्माण में सहयोग का संकल्प भी लिया।

ब्रह्मऋषि किरीट भाई ने ‘जय गोपाल, राधे कृष्ण गोविंद गोविंद’ भजन के बाद अपने आशीर्वचन में कहा कि परमात्मा ने दुर्लभ मनुष्य जीवन और शरीर हमें आनंद के लिए ही दिया है। सभी जीवों में केवल मनुष्य ही ऐसा जीव है, जिसके पास विवेक और चेतना की क्षमता है। परमात्मा ने सुंदर प्रकृति भी हमारे लिए ही बनाई है। यहाँ सब सुंदर ही सुंदर है। गरीब कोई नहीं है। गुरुकुल में पढने वाले बालकों को सबसे पहले दुर्गुणों से दूर कर शुद्धता प्रदान की जाती थी। उनके सामने माता-पिता विवाद करेंगे तो उनपर बुरा असर होगा। याद रखें कि यही बच्चे वृद्धावस्था में हमारी छड़ी बनेंगे।

बच्चों को खिलौने नहीं, समय दें -आजकल के माता-पिता बच्चों को आई-पैड, लैपटॉप और मोबाइल जैसे उपकरण पकड़ा रहे हैं। पालक घर आएं तो सेलफोन को बंद कर पत्नी, माता-पिता और बच्चों को समय दें। बंगला, गाड़ी और धन-वैभव एक समय तक जरुरी होते हैं। उम्र बढने के साथ-साथ पत्नी को प्रेम और पुरुष को शांति की जरूरत पड़ती है। मनुष्य शरीर मोक्ष की प्राप्ति के लिए मिला है। यदि कोई कमी रह गई तो व्यक्ति दोबारा जन्म लेगा इसलिए वृद्धावस्था में मनुष्य जो कुछ करना चाहता है, उसे करने देना चाहिए। जिन्दगी भी एक सौदा है जिसमें मुनाफा होना ही चाहिए। मन की शांति का हवन हो जाए, ऐसा सौदा कभी नहीं करना चाहिए। बच्चों को उनकी पसंद के कपडे पहनने देना चाहिए। उनके साथ जबरदस्ती नहीं होना चाहिए। भगवान की सेवा कर रहे हैं तो केवल दिखावा नहीं होना चाहिए। हम जब पूजा करें तो केवल पीतल की मूर्ति की नहीं, सत्य स्वरुप परमात्मा की पूजा मानकर करना चाहिए। हम पत्थर की पूजा करने वाले लोग नहीं हैं।

इंदौर की विशेषता – ब्रह्मऋषि किरीट भाईजी ने इंदौर से जुडी अपनी 35 वर्षों की यादों को ताजा करते हुए कहा कि इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है। इसकी 6 ऐसी विशेषताएँ हैं जो इसे दूसरे शहरों से अलग पहचान देती है। इनमें स्वच्छता के साथ कला, संगीत, खानपान, महाकालेश्वर का सानिध्य, व्यापार एवं शिक्षा के मामले में इंदौर की अपनी पहचान बनी हुई है। मुझे यहाँ आते हुए 35 वर्ष हो गए और इस दौरान मैंने जो कुछ देखा उसे भुजंग प्रयाग छंद के रूप में इन 6 खूबियों के साथ लिखा है।

शिष्यों को नसीहत – संत किरीट भाई ने अपने शिष्यों को नसीहत दी कि वे अपने व्यापार की योजनाएं गुप्त रखें। यदि व्यापार में सफल होना है तो अपने व्यापार की योजनाओं को सबके सामने प्रकट नहीं करें। इसी तरह जीवन में सफल होना है तो अपनी कमजोरियों को भी दूसरों को नहीं बताएं। रावण बहुत बुद्धिमान और सक्षम राजा था लेकिन विभीषण को अपनी कमजोरी बता देने के कारण मारा गया। उन्होंने भक्तों को सुझाव दिया कि 40 वर्ष की उम्र के बाद गेंहू जैसे अन्न को छोड़ दें। इसमें ग्लूटन होता है जो मोटापा, आलस्य और थकान पैदा करता है। हमारे भागवत और रामायण जैसे धर्मग्रंथों में भी रागी, ज्वार और बाजरा जैसे अन्न का उल्लेख है, गेंहू का नहीं। इसी तरह शराब से ज्यादा जान तो चीनी (शकर) ले रही है। नमक भी ज्यादा नहीं खाना चाहिए। कुछ नगरों में तो शराब की दुकानें ज्यादा नजर आती है, दूध की डेरियां नहीं। इंदौर पर महाकाल अर्थात शिवजी की भी कृपा है। शिव के बिना भक्ति का प्रवेश नहीं हो सकता। भक्ति किसी की भी करें, शिवजी और गणेशजी का स्मरण किए बिना भक्ति नहीं हो सकती। भगवान शिव ने कभी किसी को धोखा नहीं दिया।

 

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