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राम कथा चित्त नहीं, चरित्र परिवर्तन की कथा है। राम कथा चित्त में परिवर्तन करती है -पं. राहुल

घर-घर में राम और भरत जैसे भाई हो तो सारे विवाद ही खत्म हो जाएँगे – पं. राहुल
विमानतल मार्ग स्थित श्रीविद्याधाम में आद्य गौड़ ब्राह्मण सेवा न्यास के मातृशक्ति प्रकोष्ठ की मेजबानी में हुआ भरत मिलाप, आज राज्याभिषेक

इंदौर, । राम कथा चित्त नहीं, चरित्र परिवर्तन की कथा है। राम कथा चित्त में परिवर्तन करती है। चित्त में बदलाव आएगा तो चरित्र में भी आएगा ही। चित्त भगवान की कथा से जुड़ जाए तो 3 घंटे तक संसार याद नहीं आएगा। राम सच्चिदानंद हैं। राम कथा से तन को पुष्टि, मन को तुष्टि और बुद्धि को दृष्टि मिलती है। राम और भरत का मिलाप रामायण का अद्भुत और श्रेष्ठतम प्रसंग है। घर-घर में राम और भरत जैसे भाई हो, सारे विवाद ही खत्म हो जाएँगे, अव्वल तो होंगे ही नहीं।
ये दिव्य और प्रेरक विचार हैं आचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री के, जो उन्होंने शनिवार को विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम पर आद्य गौड़ ब्राह्मण सेवा न्यास के मातृशक्ति प्रकोष्ठ की मेजबानी में चल रही श्रीराम कथा में भरत मिलाप एवं वनवास काल के अन्य प्रसंगों की व्याख्या के दौरान व्यक्त किए। न्यास के अध्यक्ष पं. दिनेश शर्मा ने बताया कि कथा शुभारंभ के पहले सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्ला, मुख्य यजमान पुष्पा-अशोक शर्मा, विद्याधाम के आचार्य पं. राजेश शर्मा, कैलाश पाराशर, सुनील भंडारी, गोविन्द शर्मा, राजकिशोर शर्मा आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी भारती शर्मा, सरस्वती शर्मा, पिंकी शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, रश्मि शर्मा, प्रीति दुबे, मोनिका शर्मा, डिंपल शर्मा, पूर्णिमा शर्मा, खुशबू शर्मा एवं मेघा शर्मा सहित मातृशक्ति प्रकोष्ठ की बहनों ने की। प्रकोष्ठ की भारती शर्मा एवं पिंकी शर्मा ने बताया कि विद्याधाम परिसर में श्रीराम कथा के इस दिव्य आयोजन का समापन रविवार 7 जून को शाम 3.30 से 7.30 बजे तक राम राज्याभिषेक प्रसंग की कथा और उत्सव के साथ होगा। मातृशक्ति प्रकोष्ठ की ओर से आचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री का सम्मान भी किया जाएगा।
आचार्य पं. शास्त्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम को दिव्यता दिलाने में छोटे भाई भरत का त्याग और समर्पण जरुर याद रखा जाना चाहिए। कारण जो भी हो, आज भी भारतीय समाज में कैकेयी, सूर्पनखा और मंत्रा जैसे नाम नहीं रखे जाते। इन तीनों ने अपने कर्मों से भारतीय सनातन समाज को लांछित बना डाला। इनके नाम इतिहास में तो हैं लेकिन लोगों की नजरों से उतरे हुए हैं। भरत और राम जैसा स्नेह भाव दुनिया में कहीं और नहीं देखने को मिलता जहाँ 14 वर्ष तक कोई राजा अपने राज सिंहासन पर बड़े भाई की खडाऊ रखकर राजपाठ चलाए। इससे बड़ा त्याग, समर्पण और अपनत्व का उदाहरण और कहीं नहीं मिल सकता। भरत और राम के बीच स्नेह और विश्वास के सूत्र इतने मजबूत हैं कि हर भाई की यही इच्छा होती है कि छोटा भाई हो तो भरत जैसा और बड़ा हो तो राम जैसा। रघुकूल के चारों भाइयों के बीच एकदूसरे के प्रति अपनत्व, स्नेह, सम्मान और विश्वास के उदाहरण कदम-कदम पर मिलते हैं।

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