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वनबंधु परिषद महिला समिति द्वारा आयोजित लक्ष्मी-नारायण विवाह का शुभारंभ हुआ कलशयात्रा एवं गणेश पूजन के साथ 

 

वनबंधु परिषद महिला समिति द्वारा आयोजित लक्ष्मी-नारायण विवाह का शुभारंभ हुआ कलशयात्रा एवं गणेश पूजन के साथ

बायपास स्थित गार्डन पर आज सुबह निकलेगी ठाकुर जी की बारात, कन्या दान में मिली राशि से करेंगे वनवासी बच्चों की मदद

इंदौर। वनबंधु परिषद, फ्रेंड्स ऑफ़ ट्रायबल सोसायटी (एफटीएस) महिला समिति इंदौर की मेजबानी में दो दिवसीय लक्ष्मीनारायण विवाह का शुभारंभ शनिवार सुबह बायपास स्थित भंडारी रिसोर्ट पर जगदगुरु रामानुजाचार्य अवन्तिका पीठ युवराज स्वामी डॉ. माधव प्रपन्नाचार्य के सानिध्य एवं वनबंधु परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश माहेश्वरी के विशेष आतिथ्य और वनबंधु परिषद महिला इकाई की अनेक राष्ट्रीय पदाधिकारियों की मौजूदगी एवं मार्गदर्शन में हुआ। विवाह में कन्यादान में प्राप्त राशि से वनवासी बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी।

परिषद की अध्यक्ष सीमा रणधर एवं सचिव मीना गर्ग ने बताया कि अवन्तिका रामानुजाचार्य युवराज स्वामी माधव प्रपन्नाचार्य महाराज के सानिध्य में कलश यात्रा के पश्चात गणेश पूजन में परिषद से जुड़े पदाधिकारियों ने भाग लिया। दोपहर में तेल, पीठी और हल्दी की रस्म तथा शाम को बत्तीसी, वीरा बधाई एवं मायरे की रस्म सम्पन्न हुई। संध्या को संभाग के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों से आए स्कूली वनवासी बच्चो ने सनातन धर्म से संबंधित नृत्य नाटिका की प्रस्तुतियां देकर सभी मेहमानों को मंत्रमुग्ध बनाए रखा। ये सभी बच्चे एफटीएस महिला समिति द्वारा संचालित वनवासी अंचलों के स्कूलों से आए हैं जो रविवार को भी विवाह उत्सव में शामिल रहेंगे। इस मौके पर राष्ट्रीय महिला समिति की अध्यक्ष विनिता जाजू, संरक्षक गीता मूंदड़ा, वनबंधु परिषद की वेस्ट ज़ोन की चेयर पर्सन माधवी झंवर तथा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश माहेश्वरी के आतिथ्य में विभिन्न रस्में सम्पन्न हुई।

उत्सव समिति की संयोजक विद्या मुछाल, उर्मिला सारडा, समता मूंदड़ा, ज्योति गर्ग, मुदिता झंवर, सुनिता जैन एवं शोभना जैन के अनुसार विवाह का मुख्य उत्सव रविवार 7 जून को सुबह 9 बजे ठाकुरजी की बारात एवं 11 बजे दिव्य विवाह उत्सव के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर सभी व्यवस्थाएं उसी तर्ज पर की गई हैं, जैसे परिवार में किसी अपने युगल का विवाह होता है।

शहर में पहली बार वनबंधु परिषद की मेजबानी में अपने किस्म के इस महोत्सव में “गाँव पढ़ेगा तो देश बढेगा” थीम पर वनवासी अंचलों में चल रहे परिषद के करीब 1500 विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों की शिक्षा के सहायतार्थ धनराशि एकत्र करने के लिए विवाह स्थल पर दान पात्र रखे गए हैं।

 

 

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