सूरजकुंड, 15 नवंबर 2025 (दिव्यभूमि न्यूज): हिंदू धर्म की पवित्र परंपराओं में नर्मदा परिक्रमा एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा मानी जाती है, जो भक्तों को आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की ओर ले जाती है। इस पवित्र यात्रा के दसवें दिन, श्री अवधेश चैतन्य जी महाराज के नेतृत्व में सूरजकुंड धाम, राजस्थान से प्रारंभ हुई यह परिक्रमा शतकेश्वर महादेव मंदिर से शुरू हुई। यह यात्रा नर्मदा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित राम मंदिर पर दोपहर के विश्राम के बाद जंगल के रास्तों से आगे बढ़ी, जहां भक्तों ने प्रकृति और भक्ति का संगम अनुभव किया।

यात्रा का शुभारंभ और मार्ग शुक्रवार, 14 नवंबर 2025 को प्रारंभ हुए इस दसवें दिन की परिक्रमा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। सुबह शतकेश्वर महादेव मंदिर से पूजा-अर्चना के साथ यात्रा की शुरुआत हुई। इसके बाद भक्त सड़क मार्ग से होते हुए नर्मदा तट पर बने राम मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने दोपहर का विश्राम किया। इसके पश्चात जंगल के रास्तों से होते हुए यह यात्रा आगे बढ़ी, जो इस परिक्रमा की कठिनाई और आध्यात्मिकता को दर्शाती है।

नर्मदा परिक्रमा का आध्यात्मिक महत्व हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथों, जैसे स्कंद पुराण की रेवा खंड, में नर्मदा परिक्रमा को अत्यंत पवित्र माना गया है। यह यात्रा, जो लगभग 2,600 किलोमीटर की दूरी तय करती है, भक्तों को भक्ति और आत्म-चिंतन का अवसर प्रदान करती है। परंपरा के अनुसार, यह परिक्रमा पैदल और नंगे पैर की जाती है, जो छह से आठ महीने तक चल सकती है। प्राचीन काल में, जब सभी रीति-रिवाजों का पालन किया जाता था, यह यात्रा तीन वर्ष, तीन महीने और तेरह दिन तक भी चलती थी।

श्री अवधेश चैतन्य जी महाराज का मार्गदर्शन श्री अवधेश चैतन्य जी महाराज, जो एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और संत हैं, इस यात्रा के संचालन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में यह परिक्रमा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि भक्तों के लिए एक सामूहिक समर्पण और एकता का प्रतीक भी है। हर साल हजारों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेकर अपने जीवन को नई दिशा देते हैं और मोक्ष की प्राप्ति की कामना करते हैं।आगे की योजनायह परिक्रमा आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी, जिसमें भक्त नर्मदा नदी के तटों पर स्थित अन्य पवित्र स्थलों का भ्रमण करेंगे। यात्रा के दौरान भक्तों के लिए भोजन, विश्राम और सुरक्षा की उचित व्यवस्था की गई है, ताकि वे इस आध्यात्मिक यात्रा को सुगमता से पूरा कर सकें।
नर्मदा परिक्रमा 2025 भक्तों के लिए एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव है, जो प्रकृति, संस्कृति और भक्ति के मेल को दर्शाती है। श्री अवधेश चैतन्य जी महाराज के मार्गदर्शन में यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत शुद्धि का माध्यम है, बल्कि हिंदू धर्म की समृद्ध परंपराओं को जीवित रखने का एक प्रयास भी है।ॐ नमो नारायण
- दिव्यभूमि न्यूज टीम
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