हमारे इतिहास में कभी यह नहीं पढ़ाया गया कि मुगल काल के दौरान धर्म की लड़ाई कौन लड़ रहा था। कौन थे वह लोग जो धर्म की लड़ाई में मैदान
मां की गोद में जैसे हर दर्द की दवा होती है वैसे ही मां नर्मदा की गोद में कई औषधियों को भंडार है। नर्मदा के किनारे वनों में कई तरह
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, भारत में हिन्दू सन्तों एवं साधुओं का सर्वोच्च संगठन है। इसमें १४ अखाड़े सम्मिलित हैं जिनमें निर्मोही अखाड़ा (जो रामजन्मभूमि मामले में पक्षकार हैं) तथा श्री
भक्ति की शक्ति का अद्भुत संगम इंदौर शहर में देखने को मिला। प्रतिवर्ष रणजीत अष्टमी के मौके पर निकलने वाली बाबा रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी में अलसुबह से ही भक्तो
हर धर्म का अपना एक धार्मिक स्थल होता है, जहां कई परिवारों के लोग नियमित जाते है। इसके बाद भी उन्हें कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं देखने को मिल रहे है,
मुकेश नेमा मध्य प्रदेश में एडिशनल कमिश्नर, एक्साइज हैं। हर मुद्दे पर पैनी नज़र बनाए रखने वाले मुकेश नेमा संवेदनशील लेखक भी हैं। अपने दोस्त ओपी श्रीवास्तव जी को नर्मदा
आधुनिक युग में मां नर्मदा को चाहे मात्र एक नदी माना जाए लेकिन आज भी नर्मदा का आध्यात्मिक महत्व जानने वाले मां नर्मदा के नदी नहीं शक्ति मानते है। मां
इंदौर शहर में वैसे तो लगभग पांच खाटू श्याम मंदिर है। इसमें सबसे पहले एयरपोर्ट रोड़ पर स्थित अंबिकापुरी में खाटू श्याम बाबा का मंदिर निर्माण हुआ। इस मंदिर की
रणथंभौर त्रिनेत्र गणेशजी का मंदिर प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व एरिया में स्थित है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखते नही बनती है। बारिश के दौरान यहां कई जगह झरने फूट पड़ते
मां नर्मदा के उदगम स्थल अनूपपुर जिले में स्थित अमरकंटक के घने जंगलों में माँ नर्मदा मंदिर स्थित है इस मंदिर से लगभग 1 किमी दूर बन रहा है रहस्यमयी











