देव आराधना के समय दीपक जलाना हर हिंदू परिवार की पूजा में शामिल है। पूजा के दौरान यदि दीपक मिट्टी की बजाए आटे के बनाए जाए तो उसके कई लाभ
मां नर्मदा के परिक्रमा के दौरान भक्त मां की आराधना करने के लिए श्री नर्मदा अष्टक का नित्य पाठ करते है। माना जाता है कि नर्मदा अष्टक का नर्मदा परिक्रमा
शहर के पश्चिम क्षेत्र में आस्था और उल्लास का चार दिनी संगम मंगलवार से रणजीत हनुमान मंदिर में शुरू हो गया। यहां पहले दिन ध्वजा रोहण के साथ अष्टमी महोत्सव
माँ नर्मदा जिसे आज के कलयुग लोग आस्था के बावजूद लगातार गंदी करते जा रहे है। मां नर्मदा को जहां एक ओर मां की तरह पूजा जाता है वहीं दूसरी
मां नर्मदा परिक्रमा के दौरान नर्मदा में लगभग 41 सहायक नदियों के संगम स्थल है जहां पर आकर सहायक नदियां नर्मदा में मिलती है। जब परिक्रमा होती है तब कई
नर्मदा परिक्रमा के दौरान सहायक नदियों को पार करने की अनुमति नहीं रहती है। लेकिन परिक्रमा के दौरान प्रत्येक सहायक नदी को उसके उदगम स्थल तक जा कर पार करना
मुकेरीपुरा जो है तो शहर के व्यस्तम मार्ग पर स्थित है। इस जगह का नाम नए इंदौरी नहीं जानते है। शहर के व्यस्तम रोड़ पर स्थित यह क्षेत्र सांप्रदायिक तनाव
दत्तात्रेय जयंती के पावन अवसर पर तेजाजी नगर के निकट ग्राम पिपलिया लोहार, शिवनगर स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर एवं खेड़ापति आश्रम परिसर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
आदियोगी शिव जो कि हजारों वर्षों तक योग मुद्रा में लीन रहते है। उनके ध्यान को तोड़ना किसी के बस में नहीं है। उस योगनिंदा को तोड़ने के लिए वर्षों
हिंदू धर्म में महिनों का भी महत्व है। जैसे श्रावण माह शिव को अत्य़ंत प्रिय होता है ऐसे ही पौष माह में सूर्य आराधना का महत्व है। वैसे इस माह











