नर्मदा नदी के तट पर अदश्य साधु तपस्य़ा कर रहे है। इसका कोई प्रमाण तो नहीं मिलता क्योंकि यहां पर वे सभी साधु अदश्य रूप में मौजूद है। लेकिन जो
‘प्रकृति हमसे नाराज है और पृथ्वी खतरे में’ इस लेख में मौसम केंद्र भोपाल के सेवानिवृत्त मौ.वि.अ डॉ. जी.डी. मिश्रा ने प्रकृति में होने वाले परिवर्तन पर गहन अध्ययन किया
मां नर्मदा के ओंकारेश्वर से मोरटक्का के बीच बहती नर्मदा नदी के तट पर ठंड में अपना बसेरा बनाने वाले चकवा-चकवी जिन्हें बाह्मणी बत्ख भी कहा जाता है ने अपना
कलयुग में धर्म खत्म हो जाएगा। यह तो हम कई बार सुनते है लेकिन इस धर्म को खत्म करने वाले भी हम ही होंगे इस पर कभी विचार मंथन किया
SIR फॉर्म क्या आया कि पूरा समाज पानी पूरी वाली लाइन की तरह खड़ा हो गया। तीन अक्षरों का फॉर्म, लेकिन इतना गहरा कि अच्छे-अच्छे पढ़े-लिखे लोगों का “हम तो
इंदौर के खंडवा रोड पर स्थित शिवनगर पिपलिया लोहार का संकट मोचन हनुमान मंदिर और संस्कार केंद्र खेड़ापति आश्रम आज एक महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक क्षण के स्वागत के लिए
भोपाल मौसम विभाग के सेवानिवृत्त मौ.वि.अ. मौ.के. डॉ.जी.डी मिश्रा ने अपने एक लेख में नर्मदा के किनारे तेजी से घट रहे वनक्षेत्र पर लिखा है कि वनक्षेत्र कम होने से
शूलपाणि के जंगल और शूलपाणेश्वर महादेव मंदिर नर्मदा परिक्रमा के रोमाचंक और रहस्यमयी स्थल है। जिससें वर्तमान में तो परिक्रमावासियों के जुड़े अनुभव सिर्फ दुर्गम रास्तों और शांति सकुन से
राजसंमद जिले के कुंभलगढ़ तहसील में स्थित सूरजकुंड धाम के संतश्री अवधेश चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज जिनके तेजोप्रकाश से सूरजकुंड धाम की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली है। संतश्री इस वर्ष
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित नर्मदा प्रवाह यूनिटी मार्च यात्रा का इंदौर में आगमन पर भव्य स्वागत किया गया। इंदौर में इस यात्रा











