भिक्षावृत्ति जिसे रोकने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश के एक शहर इंदौर में जहां भिक्षावृत्ति रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे है। भिक्षावृत्ति को जहां
मां नर्मदा नदीं के कई रहस्य है जिन्हें कोई नहीं जान पाया। मां नर्मदा की महिमा का वर्णन जितना किया जाए उतना कम है। नर्मदा नदी को समस्त तत्वों की
सैकड़ो वर्षों बाद आज फिर अयोध्या में राजवंश का ध्वज फहरेगा इसके साथ ही देश में रामराज्य स्थापना का शुभदिन आया है। इसको लेकर पूरे देश में उत्साह है। यह
मां नर्मदा की परिक्रमा करने के दौरान कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि मां नर्मदा की परिक्रमा के दौरान नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो
नर्मदा तट के सौंदर्य का वर्णन कभी करते-करते इतिहासकार थक जाते थे। जो नर्मदा कभी शांत तो कभी रोद्र रूप दिखाती हुई अपनी सीमाओं में रहने के लिए प्रसिद्ध रही
राजस्थान के राजसंमद जिले की कुंभलगढ़ तहसील में स्थित सुरजकुंड दिव्य धाम के संतश्री अवधेश चेतन्य बह्मचारी महाराज की नर्मदा परिक्रमा को लगभग 16 दिन हो चुके है। यात्रा 17
नर्मदा परिक्रमा वैसे तो हर वर्ष देवउठनी एकादशी से शुरू होती है। जिसे पहले तो साधु संत ही किया करते थे। लेकिन वर्तमान में नर्मदा परिक्रमा एक एडवेंचर में भी
विश्व की एकमात्र नदी है मां नर्मदा जिसकी परिक्रमा की जाती है। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि जब नदीं उल्टी दिशा में बहती है तो उल्टी दिशा में बहने
मां नर्मदा अपने प्रण को पूरा करने वाली नदी है। इसलिए साधु संत मां नर्मदा के किनारे तपस्या करते है जिससे उनका आध्यात्मिक प्रण पुरा होता है। मां नर्मदा ने
मां नर्मदा जो सांसरिक लोगों के लिए मात्र एक नदी हो सकती है लेकिन आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले लोगों के लिए यह एक प्रेरणा है। यह एक ऐसी नदी











