भागवत ही दुनिया की एकमात्र ऐसी रचना, जो हजारों बार श्रवण के बाद भी देती है नित्य नूतन अनुभूति – पं. शर्मा
मालवा मील अग्रवाल पंचायत की मेजबानी में सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ का कलश यात्रा से हुआ शुभारंभ
इंदौर। भगवत केवल कथा नहीं , जीवन की व्यथा को दूर करने का सबसे सहज और सरल माध्यम माना गया है। पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में भागवत कथा का श्रवण और आयोजन, दोनों ही कई गुना अधिक पुण्य देने वाले पुरुषार्थ माने गए हैं। दुनिया में एकमात्र भागवत ही ऐसी रचना है जो हजारों बार श्रवण करने के बाद भी नित्य नूतन अनुभूति देती है क्योंकि यह साक्षात भगवान की वाणी है।
ये प्रेरक विचार हैं राजस्थान के प्रख्यात भागवताचार्य पं. सतीशचन्द्र शर्मा के, जो उन्होंने श्री मालवा मील अग्रवाल पंचायत की मेजबानी में मालवा मील चौराहा स्थित अग्रवाल धर्मशाला, वाय एन रोड पर मंगलवार से प्रारम्भ हुए भागवत ज्ञान यज्ञ में भागवत की महत्ता बताते हुए व्यक्त किए। कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ जिसमें मुख्य यजमान श्रीमती श्यामा नरेश मित्तल, पार्षद एवं महापौर परिषद के सदस्य नंदकिशोर पहाड़िया, समाजसेवी गणेश गोयल, संतोष गोयल, महेश अग्रवाल के आतिथ्य में पंचायत के अध्यक्ष गोविन्द गर्ग भमोरी, मंत्री सुशील अग्रवाल, संयोजक राजेश अग्रवाल, अर्पण गर्ग एवं उमेश मंगल, उपाध्यक्ष सुभाष अग्रवाल, कल्याण अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, आदि पदाधिकारी नंगे पैर भागवत जी को मस्तक पर धारण कर शामिल हुए।
बड़ी संख्या में मातृशक्ति भी कलश में पवित्र नदियों का जल लेकर यात्रा में भागीदार बनीं। अतिथियों का स्वागत महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती मोनिका पोत्दार, अनिता गोयल, मंजू गर्ग ने किया। कथा शुभारंभ पर व्यास पीठ का पूजन पंचायत के पदाधिकारियों एवं अतिथियों के साथ सतीश मंगल, गोविन्द गोयल, मनोहर अग्रवाल, गोपाल गर्ग, प्रमोद अग्रवाल आदि ने किया।
कथा में पहले दिन भागवत जी की महिमा के साथ गोकर्ण कथा का प्रसंग सुनाया गया। संचालन अध्यक्ष गोविन्द गर्ग ने किया और आभार माना अशोक अग्रवाल ने। यहाँ भागवताचार्य पं. सतीशचन्द्र शर्मा 1 जून तक प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक भागवत कथामृत की वर्षा करेंगे। इस ज्ञान यज्ञ में मालवा मील क्षेत्र से जुड़ी क्षेत्र की 40 कॉलोनियों एवं आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालु भागीदार बन रहे हैं।
आज शुकदेव जन्म एवं अमरनाथ कथा – भागवत कथा में 27 मई को शुकदेव जन्म एवं अमरनाथ कथा, 28 को श्रीराम जन्मोत्सव, 29 को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 30 को गोवर्धन पूजन एवं 56 भोग दर्शन, 31 को रुक्मणी विवाह तथा सोमवार 1 जून को सुदामा चरित्र की कथा के साथ भागवत महापूजन एवं यज्ञ हवन के बीच शुकदेवजी की बिदाई के साथ समापन होगा। श्रीकृष्ण जन्म का उत्सव फूलों की होली के साथ मनाया जाएगा। रुक्मणी विवाह के लिए श्रद्धालुओं से हल्दी-मेहँदी लगाकर आने का आग्रह किया गया है।


