हमारे इतिहास में कभी यह नहीं पढ़ाया गया कि मुगल काल के दौरान धर्म की लड़ाई कौन लड़ रहा था। कौन थे वह लोग जो धर्म की लड़ाई में मैदान
मां की गोद में जैसे हर दर्द की दवा होती है वैसे ही मां नर्मदा की गोद में कई औषधियों को भंडार है। नर्मदा के किनारे वनों में कई तरह
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, भारत में हिन्दू सन्तों एवं साधुओं का सर्वोच्च संगठन है। इसमें १४ अखाड़े सम्मिलित हैं जिनमें निर्मोही अखाड़ा (जो रामजन्मभूमि मामले में पक्षकार हैं) तथा श्री
भक्ति की शक्ति का अद्भुत संगम इंदौर शहर में देखने को मिला। प्रतिवर्ष रणजीत अष्टमी के मौके पर निकलने वाली बाबा रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी में अलसुबह से ही भक्तो
हर धर्म का अपना एक धार्मिक स्थल होता है, जहां कई परिवारों के लोग नियमित जाते है। इसके बाद भी उन्हें कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं देखने को मिल रहे है,
इंदौर शहर में वैसे तो लगभग पांच खाटू श्याम मंदिर है। इसमें सबसे पहले एयरपोर्ट रोड़ पर स्थित अंबिकापुरी में खाटू श्याम बाबा का मंदिर निर्माण हुआ। इस मंदिर की
देव आराधना के समय दीपक जलाना हर हिंदू परिवार की पूजा में शामिल है। पूजा के दौरान यदि दीपक मिट्टी की बजाए आटे के बनाए जाए तो उसके कई लाभ
मां नर्मदा के परिक्रमा के दौरान भक्त मां की आराधना करने के लिए श्री नर्मदा अष्टक का नित्य पाठ करते है। माना जाता है कि नर्मदा अष्टक का नर्मदा परिक्रमा
मुकेरीपुरा जो है तो शहर के व्यस्तम मार्ग पर स्थित है। इस जगह का नाम नए इंदौरी नहीं जानते है। शहर के व्यस्तम रोड़ पर स्थित यह क्षेत्र सांप्रदायिक तनाव
दत्तात्रेय जयंती के पावन अवसर पर तेजाजी नगर के निकट ग्राम पिपलिया लोहार, शिवनगर स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर एवं खेड़ापति आश्रम परिसर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।











