Narmada

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नर्मदा परिक्रमा- प्राकृतिक सौंदर्य से दूर होती नर्मदा

नर्मदा तट के सौंदर्य का वर्णन कभी करते-करते इतिहासकार थक जाते थे। जो नर्मदा कभी शांत तो कभी रोद्र रूप दिखाती हुई अपनी सीमाओं में रहने के लिए प्रसिद्ध रही
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कितने प्रकार की होती है नर्मदा परिक्रमा?  आइए जानते है नर्मदा परिक्रमा का महत्व

नर्मदा परिक्रमा वैसे तो हर वर्ष देवउठनी एकादशी से शुरू होती है। जिसे पहले तो साधु संत ही किया करते थे। लेकिन वर्तमान में नर्मदा परिक्रमा एक एडवेंचर में भी
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क्यों की जाती है उल्टी बहने वाली मां नर्मदा की परिक्रमा? आइए जानते है

विश्व की एकमात्र नदी है मां नर्मदा जिसकी परिक्रमा की जाती है।  लेकिन प्रश्न यह उठता है कि जब नदीं उल्टी दिशा में बहती है तो उल्टी दिशा में बहने
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प्रेम से प्रण तक एक अनकही प्रेमकहानी “मां नर्मदा”

मां नर्मदा अपने प्रण को पूरा करने वाली नदी है। इसलिए साधु संत मां नर्मदा के किनारे तपस्या करते है जिससे उनका आध्यात्मिक प्रण पुरा होता है। मां नर्मदा ने
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जीवन को बदलने वाली मां नर्मदा परिक्रमा, खोल देती है ज्ञान के मार्ग

मां नर्मदा जो सांसरिक लोगों के लिए मात्र एक नदी हो सकती है लेकिन आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले लोगों के लिए यह एक प्रेरणा है। यह एक ऐसी नदी
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भौतिकता से जीवन के यथार्थ की ओर यात्रा कराती मां नर्मदा परिक्रमा

मां नर्मदा, जिसे भौतिक जगत में नदी कहा जाता है। लेकिन जब इसे आध्यत्मिक रूप से देखा जाता है तो मां नर्मदा जीवन को बदलने वाली आत्म शुद्दि स्वरूपा दिखाई
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मां नर्मदा के आंचल में संत अवधेश चैतन्य महाराज की  परिक्रमा का आगाज

मां नर्मदा के आंचल में संत अवधेश चैतन्य महाराज ने 3000 हजार किलोमीटर की परिक्रमा का आगाज किया है। संत श्री ने ओंकारेश्वर में मां नर्मदा के निकट रह कर
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विश्व की एकमात्र मोक्षदात्रि नदी “मां नर्मदा” जिसकी संत और भक्त करते परिक्रमा

भारत में एक ऐसी नदी है जिसका धार्मिक महत्व काफी बड़ा है. लोग इसकी परिक्रमा करते हैं. इस नदी का नाम नर्मदा है जो मध्य प्रदेश से निकलती है. ये