मां नर्मदा परिक्रमा के दौरान नर्मदा में लगभग 41 सहायक नदियों के संगम स्थल है जहां पर आकर सहायक नदियां नर्मदा में मिलती है। जब परिक्रमा होती है तब कई
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नर्मदा परिक्रमा के दौरान सहायक नदियों को पार करने की अनुमति नहीं रहती है। लेकिन परिक्रमा के दौरान प्रत्येक सहायक नदी को उसके उदगम स्थल तक जा कर पार करना
मां नर्मदा के ओंकारेश्वर से मोरटक्का के बीच बहती नर्मदा नदी के तट पर ठंड में अपना बसेरा बनाने वाले चकवा-चकवी जिन्हें बाह्मणी बत्ख भी कहा जाता है ने अपना
कलयुग में धर्म खत्म हो जाएगा। यह तो हम कई बार सुनते है लेकिन इस धर्म को खत्म करने वाले भी हम ही होंगे इस पर कभी विचार मंथन किया
भोपाल मौसम विभाग के सेवानिवृत्त मौ.वि.अ. मौ.के. डॉ.जी.डी मिश्रा ने अपने एक लेख में नर्मदा के किनारे तेजी से घट रहे वनक्षेत्र पर लिखा है कि वनक्षेत्र कम होने से
शूलपाणि के जंगल और शूलपाणेश्वर महादेव मंदिर नर्मदा परिक्रमा के रोमाचंक और रहस्यमयी स्थल है। जिससें वर्तमान में तो परिक्रमावासियों के जुड़े अनुभव सिर्फ दुर्गम रास्तों और शांति सकुन से
राजसंमद जिले के कुंभलगढ़ तहसील में स्थित सूरजकुंड धाम के संतश्री अवधेश चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज जिनके तेजोप्रकाश से सूरजकुंड धाम की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली है। संतश्री इस वर्ष
भिक्षावृत्ति जिसे रोकने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश के एक शहर इंदौर में जहां भिक्षावृत्ति रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे है। भिक्षावृत्ति को जहां
मां नर्मदा नदीं के कई रहस्य है जिन्हें कोई नहीं जान पाया। मां नर्मदा की महिमा का वर्णन जितना किया जाए उतना कम है। नर्मदा नदी को समस्त तत्वों की
मां नर्मदा की परिक्रमा करने के दौरान कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि मां नर्मदा की परिक्रमा के दौरान नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो











